रविवार, 5 जनवरी 2020

२१०९ आदिवासी कलाकारों ने एक साथ बनाई वारली पेन्टिंग

२१०९ आदिवासी कलाकारों ने एक साथ बनाई वारली पेन्टिंग

वलसाड। लक्ष्य चेरीटेबल ट्रस्ट द्वारा वारली कला के प्रति जागरुकता लाने के उद्देश्य से रविवार को वलसाड में सौराष्ट्र कडवा पाटीदार सेवा समाज हॉल में वारली कला महोत्सव का आयोजन किया गया था। इसमें 2109 आदिवासी विद्यार्थियों ने एक साथ एक ही स्थान पर वारली पेन्टिंग बनाकर इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में स्थान हासिल कर वलसाड जिले का नाम वैश्विक फलक पर प्रस्थापित किया है। महोत्सव में वलसाड और तापी जिले की 13 सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया था। जिन्होंने दिए गए मटेरियल पर अपनी वारली कला प्रदर्शित की। पेन्टिंग के लिए की चेन, टी कोस्टर, पेन स्टेन्ड, मोबाइल स्टेन्ड, टेबल क्लॉक, वॉल क्लॉक, एमडीएफ ट्रे, थ्री पीस फ्रेम, डाइनिंग टेबल मैट, न्यूज पेपर स्टेन्ड, वुडन स्पून, फोटो फ्रेम, वॉल माउन्ट फ्रेम, गिफ्ट कार्ड वगैरेह समेत छह हजार से ज्यादा वस्तुओं का उपयोग किया गया था। महोत्सव में भाग लेने वाले छात्रों की स्कूल के प्रतिनिधियों को मंत्री रमण लाल पाटकर समेत अन्य गणमान्यों द्वारा सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर रमण पाटकर ने वारली कला महोत्सव में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामना देते हुए लक्ष्य चेरीटेबल ट्रस्ट द्वारा वारली कला को प्रोत्साहन देने के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि वारली एक आदिवासी जाति है, जो मुख्यत: गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर निवास करती है। उनकी जीवन शैली सादी, सरल और कला संगीत से भरपूर है। वारली चित्रकला आदिजाति समाज की विशिष्ट कला है। वारली कला द्वारा आदिवासी प्रजा अपनी जीवन शैली, संस्कृति, धर्म, त्योहार, प्राकृतिक दृश्य और भौगोलिक विविधता दर्शाते हैं। आदिवासी वर्षों से पेन्टिंग, बांस की वस्तुओं की बनावट, भरतकाम, मिट्टी की बनावट जैसी विविध कला से जुड़े हैं। इस अवसर पर वलसाड और धरमपुर के विधायकों ने भी आदिवासी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। पारडी विधायक कनु देसाई ने वारली प्रजा को कला और शांतप्रिय बताते हुए कहा कि वारली कला पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। लक्ष्य चेरीटेबल ट्रस्ट के प्रमुख भरत सिंह चुडासमा द्वारा ट्रस्ट की ओर से आदिवासी विकास की प्रवृत्तियों की जानकारी दी गई।



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वापी स्टेशन पर वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाईज यूनियन ने किया विरोध प्रदर्शन

वापी स्टेशन पर वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाईज यूनियन ने किया विरोध प्रदर्शन

वापी। वेस्टर्न रेलवे एम्पालाईज यूनियन द्वारा वापी रेलवे स्टेशन पर रविवार को विरोध प्रदर्शन किया गया। रेलवे कम4चारियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा कि सरकार भारतीय रेल के स्वरुप के साथ छेड़छाड़ कर निजीकरण करने का प्रयास कर रही है। रेलवे में कोन्ट्रेक्ट सिस्टम, कर्मचारियों का भत्ता कम करना, एग्रीमेन्ट के तहत भर्ती करना, रि इंगेजमेन्ट जैसे कदम उठाना रेलवे के अस्तित्व पर प्रहार करने के समान है। यूनियन के डिविजनल चेयरमैन प्रकाश सावलकर ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए बताया कि रेलमंत्री चाहे जितनी भी सफाई दें की निजीकरण करने की कोई मंशा नहीं है। लेकिन परिवर्तन के नाम पर रेलवे बोर्ड का मर्जर इस बात का संकेत है कि इनकी कथनी और करनी में बहुत अंतर है। परंतु एक तरफ वे लोग है जो रेल को खिलौना समझकर इसे खरीदने बेचने की सोच रहे हैं तो दूसरी तरफ वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाईज यूनियन और आल इंडिया रेलवे फेडरेशन है जिन्होंने रेलवे के अस्तित्व और उसके स्वरुप को बचाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि रेल यूनियनें अलग अलग मंडल में विभिन्न तरीके से सरकार द्वारा रेलवे के निजीकरण करने का विरोध कर रही हैं। रेलवे कर्मचारियों ने रेलवे का निजीकरण बंद करो, एनपीएस गो बैक समेत रेलमंत्री के खिलाफ भी नारेबाजी की।



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व्यापारियों और असंगठित श्रमिकों को दी गई योजनाओं की जानकारी

व्यापारियों और असंगठित श्रमिकों को दी गई योजनाओं की जानकारी
सिलवासा। केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन और लघु व्यापारी मानधन योजनाओं के बारे में दानह में प्रशासन द्वारा पात्रों को जानकारी दी जा रही है।
 जिसके अंतर्गत एक जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन श्रम विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में किया गया। जिसमें  श्रम योगी मानधन योजना और प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मानधन योजना के बारे में व्यापारियों और असंगठित श्रमिकों को जानकारी दी गई। इस दौरान उपस्थित  व्यापारियों, असंगठित मजदूरों आदि को योजना और उनके लाभों के बारे में बताया गया। बताया गया कि पंचायत बाजार, सब्जी मंडी, फल बाजार समेत में जाकर कर्मचारी पंजीकरण कर रहे है। असंगठित श्रमिक और व्यापारियों ने उक्त योजना में अपनी रुचि दिखाई है, लेकिन बैंक खातों के विवरण और आधार कार्ड जैसे आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण, पंजीकरण ड्राइव को प्रभावी ढंग से नहीं किया जा सका। असंगठित कामगार और व्यापारियों से उक्त योजनाओं के साथ खुद को पंजीकृत करने के लिए एक और अवसर के लिए अनुरोध किया है।


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पारडी में जय जलाराम ज्वैलर्स के यहां हुई डेढ़ करोड़ की चोरी के मामले को पुलिस ने सुलझाया , फरियादी ही निकला षडयंत्रकार

पारडी में जय जलाराम ज्वैलर्स के यहां हुई डेढ़ करोड़ की चोरी के मामले को पुलिस ने सुलझाया , फरियादी ही निकला षडयंत्रकार

पारडी। में जय जलाराम ज्वैलर्स के यहां करीब डेढ़ करोड़ की चोरी का मामले का खुलासा पुलिस ने कर दिया है। पुलिस ने बताया कि ज्वैलर्स  ने ही कर्ज में डूबने के बाद चोरी की झूठी कहानी बनाई थी। उसने कुछ दिन पहले ज्वैलरी दुकान का कराया गया इंश्योरंस क्लेम करने की नीयत से चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इस मामले का खुलासा करने के लिए पारडी थाने में पुलिस प्रेस कान्फ्रेन्स की गई। जिसमें इस मामले से जुड़ी पूरी जानकारी सिलसिलेवार बताई। जिसके अनुसार ज्वैलर्स दिलीप पारेख का धंधा बहुत ज्यादा मंदा था। जबकि उसके उपर बड़ा कर्ज भी हो गया था। हर महीने उसे करीब सवा लाख रुपए कई चीजों का इंस्टोलमेन्ट भी भरना पड़ रहा था। जिससे आर्थिक रुप से वह टूट गया था। इसके लिए वह कई माह से योजना बना रहा था। उसने सितंबर महीने में दुकान का इंश्योरंस भी करवाया था। पूरी योजना को अंजाम देने के लिए वह 30 दिसंबर को परिवार के सभी सदस्यों को लेकर पारडी से बाहर चला गया। लेकिन इससे पहले ज्वैलरी दुकान की तिजोरी का पूरा आभूषण हटा दिया और सारा सामान इस तरह बिखेर दिया कि मानों वहां चोरी हुई हो। इस काम उसने अपने एक कर्मचारी को भी शामिल किया था। जिसने उसकी खिड़की को तोड़ दिया जिससे लगे कि इसी रास्ते चोर आए थे। बाद में दुकान में शराब की बोतल व अन्य चीजें रखकर पक्का किया कि कई लोगों ने चोरी की है। वापस लौटकर दिलीप पारेख ने चोरी होने का हल्ला मचाया । पुलिस ने पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू की थी। लेकिन घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण करने पर ही मामला संदिग्ध मिला। पारडी पुलिस के साथ ही इस मामले में एलसीबी और इंटेलिजेन्स विंग को लगाया गया था। पूरी जांच के बाद पुलिस ने ज्वैलर्स दिलीप पारेख को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने सारा राज उगल दिया। इस मामले पर आयोजित प्रेस कान्फ्रेन्स में जानकारी देते हुए पुलिस ऑफिसर ने बताया कि ज्वैलर्स सितंबर से दिसंबर तक दुकान के  माल का स्टॉक भी मेन्टेन नहीं किया था। पुलिस के बार बार मांगने पर भी वह स्टॉक की जानकारी नहीं दे रहा था। लेकिन बाहर मीडिया में बार बार करीब डेढ करोड़ तक की चोरी की रट लगाए हुए था। उसे लगा कि चोरी की बात सही मानकर पुलिस रिपोर्ट दर्ज करती तो उसे इंश्योरंस की रकम मिलने की उम्मीद थी। जिससे वह आर्थिक परेशानी से राहत पा सकता था। लेकिन पुलिस की जांच में दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ गया। पुलिस ने ज्वैलर्स और उसका साथ देने वाले उसके कर्मचारीको गिरफ्तार कर लिया है। आगे की कार्रवाई में पुलिस जुटी है।



source https://krantibhaskar.com/police-solved-the-case-of-theft-of-one-and-a-half-crores-of-jai-jalaram-jewelers-in-pardi-the-complainant-turned-out-to-be-a-conspirator/

शनिवार, 4 जनवरी 2020

दो भाइयों की कहानी जिन्होंने शून्य से शुरुवात की और आज सौ करोड़ की कंपनी के मालिक बनने जा रहे हैं।

दो भाइयों की कहानी जिन्होंने शून्य से शुरुवात की और आज सौ करोड़ की कंपनी के मालिक बनने जा रहे हैं।

विशेष।  आज हम बात करेंगे बिजली के बारे में दोस्तों बिजली एक ऐसा आविष्कार है जिसने पूरी दुनिया को बदल दिया आज हमें हर जगह बिजली से चलने वाले उपकरण मिल जाएंगे बिजली से ही बड़े बड़े देशों की अर्थव्यवस्था मैं बदलाव आया है दोस्तों जब इस दुनिया में बिजली नहीं थी तब बिजली को खोजने वाले वैज्ञानिकों को लोग पागल समझते थे लेकिन उन वैज्ञानिकों की दूरदृष्टि ने अंदाजा लगा लिया था बिजली ही इस दुनिया का भविष्य है और ठीक ऐसा ही हुआ और आज के दौर में बगैर बिजली के इंसान का जीना लगभग नामुमकिन सा हो गया है।आज हम ऐसे दौर में है जहां पर बिजली के सारे सीमित संसाधन लगभग लगभग खत्म हो गए हैं या हम अब उनकी क्षमता में विस्तार नहीं कर सकते जैसे नदी पर बना बांध, भाप से बनने वाली बिजली की फैक्ट्री इत्यादि पर आजकल इस दौर में हम सीमित संसाधनों द्वारा उत्पन्न की गई बिजली इतनी मात्रा में नहीं है कि हम उससे बिजली की आपूर्ति को पूरा कर सके अब हमें जरूरत है प्राकृतिक संसाधनों की जो कि बिल्कुल मुफ्त है जैसे सौर ऊर्जा।आज भी भारत में हजारों ऐसे गांव हैं जहां तक बिजली पहुंच नहीं पाई है और ऐसे में एक ऐसी भारतीय कंपनी जिसका नाम है लूम सोलार जो भारत सरकार के साथ मिलकर ना सिर्फ उन घरों में सोलर पैनल लगाकर रोशनी कर रही है बल्कि देश के युवा उद्यमी और बेरोजगारों को रोजगार देकर उन्हें भी जनभागीदारी में अपना हिस्सेदार बना रही है वह भी बिना किसी इन्वेस्टमेंट के जी हां आपने बिल्कुल सही सुना जीरो इन्वेस्टमेंट से लूम सोलर कंपनी दे रही है युवाओं को लाखों रुपए कमाने का मौका।दोस्तों सन 2014 की अपेक्षा 2018 मैं तक सोलर एनर्जी में भारत ने 8 गुना ज्यादा बिजली का उत्पादन किया है और सर ऊर्जा ही बिजली की समस्या का एक स्थाई हल है और निकट भविष्य में ही सौर ऊर्जा से चलने वाले उत्पादों की संख्या में तेजी दिखाई देगी । तेजी से बढ़ते हुए महंगी बिजली दरों और बिजली गुल या पावर कट के कारण बिजली के स्थाई समाधान के लिए हिंदुस्तान में हजारों लोगों ने लूम सोलर कंपनी से अपनी जरूरत के मुताबिक सोलर पैनल लगवा कर बिजली का एक स्थाई समाधान निकाल लिया है।

क्या है लूम सोलर?

LoomSolar भारत का प्रीमियम solar ब्रांड स्टोर है, जो कि भारत में नई तकनीक सोलर पैनल, सौर इनवर्टर और सौर चार्जर को ऑनलाइन बेचता है। लूम सोलर फरीदाबाद में स्थित एक भारतीय कंपनी है। इस कंपनी को अगस्त, 2018 से भारत सरकार, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा स्टार्टअप के रूप में पहचाना मिली है। इसके साथ ही लूम सोलर ISO 9001-2015 से मान्यता प्राप्त कंपनी है। इसकी खासियत यह हैं कि ये अपने ग्राहकों के लिए नवीनतम उत्पादों की गारंटी देती है।आपको बता दें लूम सोलर कंपनी की शुरुआत इस साल फरवरी 2018 में अमोल और आमोद आनंद दोनों भाईयों ने मलकर की जिसका मकसद लोगों को सौर ऊर्जा के लाभों के बारे में जागरूक करना है। इस कंपनी को अमेरिका का विख्यात गोल्डन ब्रिज अवार्ड भी प्राप्त हुवा है।

कैसे करें कमाईं?

सौर ऊर्जा की बढ़ रही मांग को लेकर कई कंपनियां इस क्षेत्र में पैसा कमाने के लिए उतर आईं हैं। वहीं कुछ ऐसी कंपनी भी हैं, जो न सिर्फ खुद पैसा कमा रही हैं बल्कि उन लोगों को भी पैसा कमाने का मौका दे रही हैं। चलिए हम आपको बताते हैं कि लोग कंपनियों से जुड़कर कैसे पैसा कमा सकते हैं:-

पहला डीलर या डिस्ट्रीब्यूटर बनकर:- सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कई ऐसी बड़ी कंपनियां हैं जो लोगों को डीलर या डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर जोड़ने का काम कर रही हैं लेकिन इसके लिए जो लोग जुड़ने की सोच रहे हैं उनके पास खुद की दुकान और GST नंबर होना अनिवार्य है।

दूसरा इंस्टालर के रूप में:- सोलर बिजनेस से जुड़ी कई कंपनियों के माध्यम से इंस्टालर बनकर भी मोटी कमाई की जा सकती है लेकिन इसके लिए जरूरी है कि सोलर सिस्टम समेत तमाम सोलर प्रोडक्ट्स को इंस्टॉल करने के लिए इंजीनियर या फिर 3-4 लोगों की टीम हो।

तीसरा सोलर कंसलटेंट के रूप में:- सोलर क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां, सोलर कंसलटेंट के लिए कमाई के कई मौके प्रदान कर रही हैं। बशर्ते सोलर कंसलटेंट बनने के लिए मोटरसाइकिल, लैपटॉप, Smart phone होना जरूरी है।

वहीं अगर आप भी इस क्षेत्र में पैसा कमाने चाहते हैं तो आप भी 20 से 50 हजार रुपए का इंवेस्टमेंट करके बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर सोलर बिजनेस शुरुआत कर सकते हैं। लूम सोलर आपको सोलर डीलर, सोलर स्ट्रॉलर और सोलर सलाहकार बनने का मौका दे रहा है। और अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट लूम सोलर पर जाएं।

लूम सोलर भारत का प्रीमियम सौर ब्रांड स्टोर है जिसका मुख्यालय दिल्ली एनसीआर के फरीदाबाद में है। यह सौर पैनल, सौर इनवर्टर, माउंटिंग स्ट्रक्चर, शीर्ष ब्रांडों, सरकारी मंजूरी और भारत भर में 3 दिनों के भीतर किए गए वादे के साथ बेचता है। यह आईएसओ 9001-2015 प्रमाणित है और भारत सरकार द्वारा स्टार्टअप के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।

प्रेषक:

Vinod Singh



source https://krantibhaskar.com/the-story-of-two-brothers-who-started-from-zero-and-are-going-to-own-a-hundred-crore-company-today/

शुक्रवार, 3 जनवरी 2020

वापी के सर्किट हाउस में वन मंत्री रमण भाई पाटकर ने सुनी लोगों की शिकायत

वापी के सर्किट हाउस में वन मंत्री रमण भाई पाटकर ने सुनी लोगों की शिकायत

वापी। गुजरात सरकार के वन मंत्री रमण भाई पाटकर ने लोगों के पास पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और उसे दूर करने के प्रयास के तहत गुरुवार को वापी के सर्किट हाउस में एक कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें उन्होंने अलग अलग विभाग से जुड़ी लोगों की समस्याएं सुनी। लोगों ने अपनी समस्याएं बताने के बाद उसे दूर करने का अनुरोध मंत्री से किया। लेकिन उन्ही की पार्टी के स्थानीय पार्टी नेता या कार्यकर्ता इसमें उपस्थित नहीं थे। नगर पालिका प्रमुख भी नहीं थे। इस कार्यक्रम में उन्होंने सभी शिकायतों को शांतिपूर्वक सुनने के बाद उपस्थित अधिकारियों को एक तय समय में इसे दूर करने को कहा। जिससे लोग भी काफी प्रभावित दिखे।
इसमें विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 17 लोगों की समस्याएं सुनी गई। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से इस बारे में पूरा जानकारी ली और जल्द से जल्द लोगों की शिकायत दूर करने का निर्देश दिया। मंत्री रमण पाटकर ने यह भी बताया कि तीन करोड़ के खर्च से चणोद गांव में गटर का निर्माण करवाना है, लेकिन अवैध अतिक्रमण के कारण वह अटका है। इन्हें दूर कर 10 जनवरी से काम शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि वन अधिकार के तहत जिले में 1700 में से करीब एक हजार से ज्यादा लोगों को जमीन की सनद दी गई है। बाकी बचे लोगों को भी यह जल्द देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इस तरह के कार्यक्रम से दूर की गई समस्याओँ के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। मालूम हो कि रमण भाई पाटकर इससे पहले भी यहां पर समस्याएं सुनने के लिए कार्यक्रम करते रहे हैं। लेकिन कभी भी नगर पालिका का कोई पार्षद, प्रमुख या संगठन के स्थानीय नेता उपस्थित नहीं हुआ है। इसके लिए रमण पाटकर और कनु देसाई के बीच गुटबाजी को भी कारण माना जाता है। यहां के भाजपा नेता रमण पाटकर पर आरोप लगाते हैं कि वे किसी को फोन पर इसके बारे में आमंत्रण नहीं देते हैं और अपने मनमर्जी से कार्यक्रम तय करते हैं। जबकि रमण पाटकर ने कई बार यह कहा है कि मंत्री के कार्यक्रमों की सूची पहले ही सभी को जारी हो जाती है।



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कलेक्ट्रेट में मंत्री की उपस्थिति में समीक्षा बैठक, लंबित प्रश्नों के निराकरण पर चर्चा

कलेक्ट्रेट में मंत्री की उपस्थिति में समीक्षा बैठक, लंबित प्रश्नों के निराकरण पर चर्चा

वलसाड। जिले में लंबित प्रश्नों के निराकरण के लिए वन और आदिजाति विकास राज्यमंत्री रमण लाल पाटकर ने वलसाड कलेक्ट्रेट में समीक्षा बैठक की। जिसमें कलेक्टर के साथ कई अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में मंत्री रमणलाल पाटकर ने खरीफ ऋतु के दरम्यान हुई बेमौसम बरसात के कारण किसानों की फसल को हुए नुकसान के मुआवजे के लिए समयावधि बढ़ाने की जानकारी दी। उन्होंने बाकी रह गए किसानों को भी इसका लाभ दिलाने के लिए एफआरए के अंतर्गत अधिकार पत्र किसानों को देने का प्रयास करने की सूचना दी। उन्होंने कहा कि जिले में हो रहे विकास कामों को जल्द पूरा करनेके लिए अधिकारियों को लगातार मोनिटरिंग करना चाहिए। कलेक्टर सीआर खरसाण ने सभी अधिकारियों को समस्याओं के निराकरण के लिए जरुरी सूचना दी। बैठक में चणो में गटर लाइन का काम, उमरगाम में साइन्स कॉलेज, खेल कूद का मैदान, मामलतदार कार्यालय तथा उमरगाम नगर पालिका कार्यालय निर्माण के लिए जमीन आवंटन, नारगोल- संजाण बाइपास रोड का काम, दरियाई कटान रोकने, पानी पूरवठा के काम समेत कई योजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में जिला विकास अधिकारी अर्पित सागर, निवासी अधिक कलेक्टर एनए राजपूत, सहित जिले के अमलीकरण अधिकारी उपस्थितथे।



source https://krantibhaskar.com/review-meeting-in-presence-of-minister-in-collectorate-discussion-on-disposal-of-pending-questions/

गुरुवार, 2 जनवरी 2020

वापी में एक नाबालिग ने ही कर दी नाबालिग की हत्या

वापी में एक नाबालिग ने ही कर दी नाबालिग की हत्या

वापी। वापी में 17 साल के नाबालिग लड़के की नाबालिग ने ही चाकू मारकर हत्या कर दी । घटना के पीछे कुछ दिन पहले हुए झगड़े और मारपीट को कारण बताया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों लड़के चंडोर की एक सोसायटी में आसपास की बिल्डिंग में रहते हैं। इस मामले की रिपोर्ट मृतक के बड़े भाई जैकी कुमार जाटव ने लिखाई है। पुलिस के अनुसार 14-11-2019 को रोहित और आरोपी का बड़ा भाई दमण की एक ही कंपनी में काम करने गए थे। वहां पर खाना खाते समय दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। जिसे लेकर घर आने के बाद मारपीट भी हुई थी। इसकी रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी। इसी बात की रंजिश को लेकर बुधवार शाम को बिल्डिंग की पार्किंग में रोहित पर नाबालिग आरोपी ने चाकू मारकर गंभीर रुप से घायल कर दिया। इसका पता चलने पर रोहित को लेकर उसका भाई जनसेवा अस्पताल गया। जहां उसे आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। लेकिन कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। घटना का पता चलने पर पुलिस भी अस्पताल पहुंची थी और बाद में आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में पुलिस आगे की छानबीन कर रही है।



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एक्सप्रेस वे के लिए जमीन मापने गए अधिकारियों का किसानों ने किया विरोध

एक्सप्रेस वे के लिए जमीन मापने गए अधिकारियों का किसानों ने किया विरोध

वलसाड। वलसाड के अटगाम में एक्सप्रेस वे के लिए जमीन मापने गए अधिकारियों का ग्रामीणों व किसानों ने प्रचंड विरोध किया। इसका पता चलने पर अप्रिय घटना रोकने के लिए पुलिस समेत अन्य अधिकारी भी वहां पहुंच गए और किसानों को शांत किया। ज्ञातव्य है कि काफी समय से एक्सप्रेस वे के लिए जमीन संपादन का वलसाड समेत दक्षिण गुजरात में कई जगह किसान विरोध कर रहे हैं। गुरुवार को भी अटगाम में एक्सप्रेस वे के लिए संपादित होने वाली जमीन को मापने के लिए अधिकारी पहुंचे थे। इसका पता चलने पर किसान व गांव के लोग बैनर लेकर पहुंच गए और इस काम का विरोध करने लगे। लोगों ने हमें जीने दो, जमनी हमारी मां है और विकास के लिए विनाश नहीं जैसे बैनर लेकर विरोध में धरना भी दिया। घटना का पता चलने पर बड़ी संख्या में पुलिस भी पहुंच गई और प्रांत अधिकारी ने भी किसानों के साथ उन्हें समझाने की कोशिश की। लेकिन किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उन्हें इस मामले में अंधेरे में रख रहा है और जमीन मापने से पहले भी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई थी। लोगों के विरोध को देखते हुए प्रांत अधिकारी ने आश्वासन दिया कि किसानों की समिति के साथ इस मामले में मीटिंग की जाएगी और उसके बाद ही आगे कोई कार्य होगा। इसके बाद लोग शांत हुए।



source https://krantibhaskar.com/farmers-protest-against-officials-who-went-to-measure-land-for-express-way/

थर्टी फस्र्ट पर 750 से ज्यादा शराबियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

थर्टी फस्र्ट पर 750 से ज्यादा शराबियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

वापी।
दमण और सिलवासा से सटे गुजरात की चेकपोस्टों के 31 दिसंबर से पहले हटने के बाद लोगों ने सोचा था कि इस बार थर्टी फस्र्ट पर शराब पीने के रंग में कोई भँग नहीं पड़ेगा। लेकिन वलसाड पुलिस ने लोगों का यह भ्रम दूर कर दिया। एक दिन पहले से ही पुलिस ने दमण और सिलवासा से शराब पीकर आने वाले लोगों की जांच शुरू कर हवालात में डालना शुरू कर दिया था। वापी डीवाईएसपी कार्यालय के क्षेत्र में आने वाले सभी पुलिस थानों में थर्टी फस्र्ट पर 750 से ज्यादा शराबियों को गिरफ्तार किया गया। पूरे जिले में शराब पीने पर गिरफ्तार होने वाली की संख्या 1200 के पार कर गई। इस बार पुलिस ने शराबियो के खिलाफ सघन अभियान चलाया और डुंगरा, टाउन तथा जीआईडीसी, भिलाड, उमरगाम समेत अन्य पुलिस थाना मिलाकर 750 से ज्यादा शराबियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने 60 से ज्यादा वाहनों को भी पुलिस ने जब्त किया। पुलिस ने शराबियों को पकडऩे के लिए जगह जगह प्वाइंट बनाया था। बीते वर्ष हुई गिरफ्तारियों से ज्यादा लोगों को इस बार पुलिस ने गिरफ्तार किया। गुजरात सरकार द्वारा शराब पीने पर गिरफ्तार लोगों की जमानत के लिए कड़े प्रावधान के कारण जमानदार ढूंढऩे में लोगों को पसीने छूट गए। कई लोगों ने तो शराब पीने से ही तौबा कर ली।

प्रेषक:

Ramesh Tiwari



source https://krantibhaskar.com/police-arrested-over-750-alcoholics-at-thirty-first/

वागलधरा प्राथमिक स्कूल के प्रिंसिपल के ट्रांसफर से नाराज महिलाओं ने स्कूल गेट पर मारा ताला

वागलधरा प्राथमिक स्कूल के प्रिंसिपल के ट्रांसफर से नाराज महिलाओं ने स्कूल गेट पर मारा ताला

वलसाड।
वलसाड के वागलधरा प्राथमिक स्कूल के प्रिंसिपल अजय बाबूभाई लाड के ट्रांसफर से नाराज गांव की महिलाओं ने सोमवार को स्कूल में तालाबंदी कर दी। स्कूल के विद्यार्थी भी स्कूल के बाहर आकर धरने पर बैठ गए। इस बारे में प्राप्त जानकारी के मुताबिक वागलधरा प्राथमिक स्कूल में कक्षा एक से 8 तक इस समय 200 विद्यार्थी हैं। पांच साल पहले अजय बाबू भाई लाड प्रिंसिपल बने थे। उसके बाद से उन्होंने स्कूल का खूब विकास और बच्चों के लिए सुविधाएं देकर स्कूल में शिक्षा का स्तर सुधारा है। उनके काम से गांव के लोग और छात्रों के पैरेन्ट्स भी खूब प्रभावित हैं। लेकिन अचानक विभाग ने अजय भाई लाड का ट्रांसफर कर दिया है। इसका पता चलने पर गांव की महिलाएं स्कूल पहुंचे और छात्रों को बाहर कर गेट पर ताला लगा दिया। इसमें छात्रों के पैरेन्ट्स भी उनके समर्थन में रहे। लोगों ने बताया कि उन्हें डर है कि अजय बाबू लाड के न रहने पर उनके बच्चों की पढ़ाई पर विपरित प्रभाव पड़ेगा। बच्चों ने भी स्कूल के बाहर बैठकर पैरेन्ट्स के साथ नारेबाजी की। इसके साथ ही लोगों ने ट्रांसफर को भी रद्द करने की मांग की।

प्रेषक:

Ramesh Tiwari



source https://krantibhaskar.com/angry-women-transferred-lock-of-school-gate-due-to-transfer-of-principal-of-vagaladhara-primary-school/

भडकमोरा में जल गई पांच मोटरसाइकिलें

भडकमोरा में जल गई पांच मोटरसाइकिलें

वापी।
वापी के भड़कमोरा विस्तार में सिटी सेन्टर की पार्किंग में अचानक पांच मोटरसाइकिलें जल गई। इसके लिए शोर्ट सर्किट को कारण माना जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार भड़कमोरा मुख्य रोड किनारे सिटी सेन्टर शोपिंग कॉमप्लेक्स है। जहां कई दुकानें व आफिसे हैं। यहां पर सुबह में पार्किंग में दुकान के सामने चार मोटरसाइकिलें खड़ी थी। इसमें से अचानक एक मोटरसाइकिल में आग लग गई। जब तक लोग कुछ समझतेतब तक आग ने चारों मोटरसाइकलों को अपनी चपेट में ले लिया था। सूचना पाकर नोटिफाइड फायर टीम पहुंची लेकिन तब तक सभी मोटरसाकिलें खाक हो गई थी। इस बारे में लोगों ने बताया कि शोर्ट सर्किट के कारण पहले एक मोटरसाइकिल में आग लगी थी। कुछ देर में ही उसकी लपटों ने अन्य मोटरसाइकिलों को भी जद में ले लिया और कुछ देर में ही सभी मोटरसाइकिलें खाक हो गई। इसमें से एक मोटरसाइकिल का तो अभी नंबर भी नहीं लगा था।

प्रेषक:

Ramesh Tiwari



source https://krantibhaskar.com/five-motorcycles-burned-in-bhadkamora/

परिवार गया दर्शन करने, चोरों ने साफ कर दी ज्वैलर्स की तिजोरी

परिवार गया दर्शन करने, चोरों ने साफ कर दी ज्वैलर्स की तिजोरी

पारडी।
पारडी में तीर्थयात्रा पर गए एक ज्वैलर्स की दुकान की तिजोरी चोरों ने साफ कर दी। वापस लौटने पर दुकान और घर में सामान बिखरा देखने पर जब चोरी का पता चला तो ज्वैलर्स और परिवार के पैरों से जमीन खिसक गई। क्योंकि चोरों ने कुछ नहीं छोड़ा था। करीब डेढ़ करोड़ कीमत का सोना चांदी और आभूषण चोरी कर चोर फरार हो गए थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार पारडी में दिलीप पारेख की जय जलाराम ज्वैलर्स का बड़ा शोरुम है। शोरुम के उपरी मंजिल पर दिलीप पारेख परिवार के साथ रहते हैं। उनके एक भाई का ज्वैलरी का शोरुम अतुल में भी है। जानकारी के अनुसार दिलीप पारेख अपने परिवार के साथ सौराष्ट्र में पांच धाम की यात्रा पर गए थे। गुरुवार से दुकान और मकान बंद था। लेकिन जब वहां से वापस लौटे तो देखा कि मकान के टैरेस का दरवाजा खुला था और घर में सामान भी बिखरा था। नीचे दुकान के अंदर जाकर देखा तो वहां चोरों ने कुछ नहीं छोड़ा था। नंबर कोड वाली तिजोरी तोड़कर चोरों ने उसमें रखा पांच किलो से ज्यादा का सोना चांदी और आभूषण चोरी कर लिया था। दिलीप पारेख के अनुसार करीब डेढ़ करोड़ से ज्यादा का माल चोरी हुआ है। इतनी बड़ी चोरी से परिवार डिप्रेशन में आ गया। इसका पता चलने पर उनके भाई व अन्य स्वजन भी पहुंच गए थे। चोरी का पता चलने पर पारडी पुलिस भी पहुंच गई थी। चोरों ने घर में शराब की महफिल भी जमाई थी। क्योंकि वहां पर शराब की बोतल भी बरामद हुई है।

प्रेषक:

Ramesh Tiwari



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बुधवार, 1 जनवरी 2020

खुशमान ने दिए भाजपा को 50000 लेकिन चर्चा 5 लाख कि अब बाकी रकम कहा गई?

खुशमान ने दिए भाजपा को 50000 लेकिन चर्चा 5 लाख कि अब बाकी रकम कहा गई?

दमण। राजनीति दो शब्दों का एक समूह है राज+नीति। (राज मतलब शासन और नीति मतलब उचित समय और उचित स्थान पर उचित कार्य करने कि कला) अर्थात् नीति विशेष के द्वारा शासन करना या विशेष उद्देश्य को प्राप्त करना राजनीति कहलाती है। दूसरे शब्दों में कहें तो जनता के सामाजिक एवं आर्थिक स्तर (सार्वजनिक जीवन स्तर) को ऊँचा करना राजनीति है। नागरिक स्तर पर या व्यक्तिगत स्तर पर कोई विशेष प्रकार का सिद्धान्त एवं व्यवहार राजनीति (पॉलिटिक्स) कहलाती है। राजनीति कि शुरूआत रामायण काल से भी अति प्राचीन है। महाभारत महाकाव्य में इसका सर्वाधिक विवरण देखने को मिलता है, चाहे वह चक्रव्यूह रचना हो या चौसर खेल में पाण्डवों को हराने कि राजनीति। वैसे यदि राजनीति स्वार्थ या ऐशगाह आबाद करने कि हो तो उस राजनीति से जनता का क्या भला होगा यह सवाल जनता तब से कर रही है जब से जनता ने राजनीति करने वाले नेताओं कि राजनीति में स्वार्थ कि गंध महसूस की। जनता काफी लम्बे समय से यह जानना चाहती है कि दमण-दीव के जिन नेताओं के पास कोई कारोबार नहीं है, कोई व्यवसाय नहीं है वह बड़ी बड़ी गाड़ियों और कोठियों का मजा लेने के लिए धन कहा से लाते है?

संघ प्रदेश दमण-दीव में ऐसे कई नेता है जिनके स्वार्थ कि टोकरी समय समय पर जनता के सामने आती रही है और ऐसे भी कई नेता है जिनके स्वार्थ कि टोकरी जनता के सामने आनी अभी भी बाकी है। दमण-दीव कि जनता कि माने तो वासू पटेल जैसे कुछ गीने-चुने नेताओं कि कूटनीति और कुत्सित चाल के सामने कई बार दमण-दीव के बड़े बड़े और पुराने भाजपाई नेता हाशिये पर दिखाई दिए। दमण-दीव के राजनीतिक प्रबुद्धों कि माने तो दमण-दीव भाजपा को मजबूत बनाने में बी-एम माछी, जोगीभाई, देवचंदभाई, देवजीभाई, बालुभाई, प्रकाशभाई, प्रमोद दमणिया, महेश टंडेल, लखम टंडेल और जिग्नेश जोगी जैसे कई पुराने भाजपाइयों कि मुख्य भूमिका रही है। लेकिन इनमे से कई पुराने और अनुभवी नेताओं को दरकिनार कर फिलवक्त वासू जैसे नेता अपनी अलग ही खिचड़ी पका रहे है ताकि समय आने पर वह अकेले उक्त पकी खिचड़ी से अपना पेट भर सके। दमण के कई भाजपा नेताओं का ऐसा मानना है कि वासू के साथ यदि व्यवहार ख़राब हुआ तो पार्टी में ना पद मिलेगा ना पवार और यदि वासू के साथ व्यवहार ठीक है तो बिना पद भी पवार मिल सकता है बशर्ते वासू और वासू जैसे अन्य नेताओं को समय पर चढ़ावा मिलता रहे अब ऐसा इस लिए भी कहा जा रहा है क्यो कि विवेक धाड़कर कि वासू से अच्छी बनती है और इसमे कोई दो राय नहीं कि राजनीति में अच्छी बनने और ना बनने के भी अपने अलग अलग नफे-नुकसान होते है।

भाजपा के एक नेता ने अपना नाम ना बताने कि शर्त पर बताया कि यदि वासू पटेल ने भाजपा में ईमानदारी से काम किया होता तो जिला पंचायत में भाजपा कि सत्ता होती। लेकिन पार्टी में आज भी पैसे का खेल जारी है और नोट के दम पर पार्टी के अंदर बैठे कुछ गीने-चुने लालची नेता, पार्टी के शिद्धांतों को दरकिनार कर पद और कुर्सी का सौदा किसी के भी साथ करने को तैयार रहते है। इतना ही नहीं बताया यह भी जाता है कि पार्टी के अधिकतर फैसले वासू पटेल और विवेक धाड़कर कि सुविधा और स्वार्थशिद्धि के अनुसार लिए जाते रहे। पार्टी में किसे लेना है क्या पद देना है और किस सत्ता कि कुर्सी पर बिठाना है किसे सस्पेंड करना तथा किसका सस्पेंसन केनसल करना है यह कार्यकर्ताओं के सुझाव और चुनाव से नहीं नहीं, बल्कि नोटो के बंडलों के जरिए होता रहा।

भाजपा कि नीति भी कमाल है जिसने कमल खिलाने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया उसे पार्टी तबजजो देने पर विचार भी नहीं कर रही और जिनहोने ताउम्र भाजपा के कमल को कुचलने का काम किया वह उन्होने अपने पैसे के दम पर दमण-दीव भाजपा का सिरमोर बनने का ख्वाब दिन में ही पूरा कर लिया।

भाजपा में भ्रष्टाचार और नेताओं कि कुत्सित चाल पर अभी एक ताजा मामले कि जानकारी देते हुए यह भी बताया कि अभी कुछ समय पहले ही दमण नगर पालिका के पार्षद खुशमान ढींगमार के द्वारा भाजपा के खाते में 50 हज़ार रुपये कि रकम जमा हुई जबकि चर्चा यह है कि खुशमान ढींगमार ने 5 लाख दिए! तो अब सवाल यह है कि जब चर्चा 5 लाख कि है तो बाकी के 4.5 लाख कहा गए? वैसे इस चर्चा के पीछे भी एक दूसरा कारण और है और वह यह है कि जब दमण नगर निगम के चुनाव हुए थे, तब खुशमान ढींगमार ने भाजपा उम्मीदवार मुकेश पटेल के वीरुध चुनाव लड़ा था जिसके चलते खुशमान ढींगमार को पार्टी से 6 साल के लिए बाहर कर दिया। 6 साल तो अभी पूरे नहीं हुए, लेकिन खुशमान ढींगमार को पुनः भाजपा में स्थान दे दिया गया और इसके पीछे खुशमान ढींगमार द्वारा दी गई रकम का हाथ बताया जाता है। यह सब देखकर अब उन भाजपा कार्यकर्ताओं के मन में यह सवाल है कि जिनके पास पैसा नहीं है उनका क्या होगा? यदि पैसे के दम पर नियुक्तियाँ और निलंबन का खेल चलता रहा तो पार्टी के काल करने वाले गरीब कार्यकर्ता पार्टी के नेताओं को देने के लिए पैसे कहा से लाएँगे? वैसे अभी कुछ दिनों पहले कांग्रेस अध्यक्ष केतन पटेल के भाई जिग्नेश पटेल के भाजपा में शामिल होने पर भी प्रदेश कि चौपालों पर चर्चे हुए हुई थी कि जिग्नेश पटेल ने भाजपा में शामिल होने के लिए लाखों ख़र्च किए है, वैसे इस मामले में जनता ने नवीन के साथ साथ कई नेताओं का नाम भी भ्रष्टाचार में उछला तो था लेकिन लगता है दमण से अब तक वह नाम दिल्ली नहीं पहुंचे। जिग्नेश पटेल को भाजपा में शामिल करने के बाद यह भी देखा गया कि भाजपा जिग्नेश को अपने पुराने कार्यकर्ताओं से अधिक तबज्जो देने लगी है इससे भाजपा के कई कार्यकर्ता अब यह सोच रहे है कि आगे क्या होगा? क्या इसी तरह भाजपा में पैसे के दम पर पदों का आदान प्रदान तथा नियुक्तियाँ और निलंबन वापसी जारी रहेगी या फिर केंद्रीय आला कमान इस तरह कि राजनीति करने वालों को भाजपा से बाहर का रास्ता दिखाएगी? दमण-दीव भाजपा के नेता ने अपना नाम ना बताने कि शर्त पर बताया कि दमण-दीव भाजपा के कई नेताओं कि काली-करतूतें कई बार भाजपा को शर्मशार कर चुकी है लेकिन अब तक केंद्रीय भाजपा ऐसी जांकारियों से अछूता रहा, लेकिन अब बात कुछ और है अब चर्चा दमण-दीव भाजपा कार्यालय से बाहर निकालकर आम जनता कि जुबान तक पहुँच गई है और जनता चौपालों पर चर्चा कर रही है। वैसे उक्त पूरे मामले को तथा जनता में चल रही चर्चा को देखते हुए केंद्रीय भाजपा को यह विचार करने कि जरूरत है कि मोदी के नाम पर वोट मांगने के बाद प्रदेश भाजपा के कार्यकर्ता और मंत्री यदि मोदी को कोसने वाले को पैसे के दम पर पार्टी में स्थान दे दे तो उससे किस कि किरकिरी होगी? वैसे केंद्रीय भाजपा नेता इस मामले पर तथा जनता के सवालों और चर्चा पर क्या संज्ञान लेते है यह तो आने वाले समय में पता चलेगा।



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वापी, दमण, सिलवासा के कई बिल्डर हुए सतर्क, ग्राहकों को फोन पर जानकारी देना किया बंद, अब बात बंद दरवाजे में होगी।

वापी, दमण, सिलवासा के कई बिल्डर हुए सतर्क, ग्राहकों को फोन पर जानकारी देना किया बंद, अब बात बंद दरवाजे में होगी।

वापी। टैक्स चोरी और काले-धन कि लेन-देन पर कई चौकाने वाले खुलासे होने के बाद अब एक नई रोचक तथा चौकने वाली जानकारी सामने आई है। जानकारी मिली है कि काले-धन कि लेन-देन कर टैक्स चोरी करने वाले बिल्डरों को अब दिन-रात पकड़े जाने का भय सता रहा है और इसी भय के चलते वापी, दमण और सिलवसा के कई बिल्डरों ने स्वय सेल्स-मेन का काम शुरू कर दिया है। साथ ही काले-धन कि लेन-देन करने वाले सभी बिल्डरों ने अपने सेल्स कर्मियों को यह निर्देश भी दिया है कि खरीदार कि पूरी तहक़ीक़ात करने से पहले उसे बंगले, फ्लेट, दुकान कि असली क़ीमत और रजिस्ट्री कि ( यानि कितना काला धन लिया जाएगा और कितना सफ़ेद धन लिया जाएगा ) इसकी जानकारी ग्राहक को तब तक ना दे जब तक कि पूरी तरह से यह तसल्ली ना हो जाए कि बिल्डर उसे काले-धन देने के झांसे में फ़सा सकता है। सेल्स कर्मियों का कहना है यदि क़ीमत नहीं बताएँगे तो बंगले, फ्लेट, दुकान की बिक्री कैसे होगी? इस पर बिल्डर का कहना है कि कभी भी आयकर अधिकारी ग्राहक बनकर बंगले, फ्लेट, दुकान कि असली क़ीमत जानने आ सकते है इस लिए बुकिंग इंकवयरी के लिए आए ग्राहक / ख़रीदार को प्रॉपर्टी कितने में बेची जाएगी और कितनी रकम का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा इसकी जानकारी ना दी जाए। एक सेल्स कर्मी ने इस पर बिल्डर से चुटकी लेते हुए यह सवाल कर लिया कि आप तो कहते थे न अपना नव्वे माले तक सेटिंग है फिर भय काहेका? बिल्डर ने इस सवाल का जवाब तो नहीं दिया, लेकिन बिल्डरों को शंका है कि सेल्स कर्मियों कि वजह से कभी भी उनकी काली करतूतें सरकार के सामने आ सकती है।

बिल्डर बने सेल्स-मेन

यह जानकारी मिलने के बाद, मिली जानकारी में कितनी सत्यता है यह जानने के लिए क्रांति भास्कर टिम के एक सदस्य ने ख़रीदार बनकर कई बिल्डरों से फोन पर, बंगले, फ्लेट, दुकान कि बिक्री क़ीमत और रजिस्ट्री कितनी रकम कि होगी यह जानकारी मांगी। बिल्डर और बिल्डर के ट्रेंड कर्मचारियों का कहना है कि जब तक आप बिल्डर के कार्यालय अथवा प्रोजेक्ट पर नहीं आते तब तक किसी बंगले, फ्लेट, दुकान कि असली क़ीमत या रजिस्ट्री कि क़ीमत के बारे में आपको फोन पर नहीं बताया जाएगा। अब कितने कमाल कि बात है कि एक और तो बिल्डर प्रॉपर्टी बेचने के लिए तरह तरह के विज्ञापन कर रहे है बड़े बड़े होल्डिंग लगा रहे है और दूसरी और फोन पर खरीदार / ग्राहकों को प्रॉपर्टी कि क़ीमत कि जानकारी देने से ऐसे माना कर रहे है जैसे वह बिल्डर नहीं खुख्यात तस्कर हो। आयकर अधिकारी चाहे तो वह भी बिल्डरों से फोन पर सम्पर्क कर सच जान सकते है बशर्ते बिल्डर से फोन पर सम्पर्क करने वाला अधिकारी बिल्डर का दोस्त ना हो या बिल्डर के भ्रष्टाचार में हिस्सेदार ना हो।



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बलात्कार और समाज का नजरिया

बलात्कार और समाज का नजरिया

विशेष।

बलात्कार शब्द ही इतना डरावना है जब भी इसको सुना, पढ़ा जाता है तो दिमाक में एक तस्वीर उभर जाती हैं की एक महिला पर पुरुष का यौन हमला, एक महिला की जिंदगी का खात्मा।

पूरे विश्व मे ये बलात्कार एक समस्या बनी हुई है। लेकिन भारत मे ये समस्या विकराल रूप धारण किये हुए है। वर्ष 2011 में देशभर में बलात्कार के कुल 7,112 मामले सामने आए, जबकि 2010 में 5,484 मामले ही दर्ज हुए थे। आंकड़ों के हिसाब से एक वर्ष में बलात्कार के मामलों में 29.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रतिदिन लगभग 50 बलात्कार के मामले थानों में पंजीकृत होते हैं। 2018 में बलात्कार के 18 हजार से भी ज्यादा मामले दर्ज किए गए। इससे भी कई गुना मामले ऐसे भी रहे जिनको लड़की ने या परिवार ने इज्जत और डर के कारण पुलिस में दर्ज ही नही करवाया या पुलिस ने दर्ज ही नही किये।

अभी 2 दिन पहले हैदराबाद में डॉ प्रियंका रेड्डी के साथ और झारखंड में लॉ स्टूडेंट की छात्रा के साथ बलात्कार की जघन्य व अमानवीय घटना घटित हुई। हैदराबाद में डॉ प्रियंका जो वेटर्निरी डॉ थी ड्यूटी से अपने घर आ रही थी रास्ते में उसकी स्कूटी खराब हो जाती है। उसकी मद्दत के लिए 4 लोग आते है। वो ही चारो इंसान जो मद्दतगार बन कर आये थे। जिन पर एक लड़की ने मुसीबत के समय विश्वास किया कि ये उसकी मद्दत करेगें। कितना खुश हुई होगी। दिल को सकूं मिला होगा मद्दत के लिए आये हाथों को देखकर। लेकिन अगले ही पल मद्दत के लिए आये इंसानो ने अपने उन्ही हाथों को जिन पर एक लड़की ने कुछ समय पहले विश्वास किया था, वहसी जानवर बन कर डॉ प्रियंका रेड्डी पर हमला करते है। उसको उठा ले जाते है उसके बाद वो चारो बलात्कार करते है फिर डॉ प्रियंका को जला कर मार देते है।

ऐसे ही झारखंड में लॉ की स्टूडेंट अपने पुरुष मित्र के साथ बात कर रही होती है। 12 वहसी जानवर आते है और बन्दूक के नोक पर उनको अगुआ करके एक ईंट-भट्ठे पर ले जाकर लड़की से बलात्कार करते है।

ये 2 बलात्कार की घटनाएं कोई पहली और आखिरी घटना नही है। रोजाना ऐसी घटनाएं सुनने को मिलती है। आंकड़ो पर नजर डाली जाए जो आंकड़े एक आम इंसान को हिला कर रख सकते है।

जब भी कोई ऐसी घटना घटित होती है तो देश के अलग-अलग हिस्सों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो जाती है। शोशल मीडिया जो वर्तमान में आम जनता को अभिव्यक्ति का प्लेटफार्म प्रदान करता है, खुशी हो या गम वो यहां अपनी अभिव्यक्ति जाहिर करता है।  प्रत्येक व्यक्ति जो शोशल मीडिया से जुड़ा हुआ है ऐसी अमानवीय घटना पर अपना पक्ष रखता है, अपना गुस्सा जाहिर करता है। वो रेपिस्ट के लिए कड़ी सजा की मांग करता है।

 लेकिन ये गुस्सा, कड़ी सजा की मांग, फाँसी की मांग, क्या सभी बलात्कार की घटनाओं में होती है। सायद ऐसा नही है।

वर्तमान की इन दोनों घटनाओं को देखे या इससे पहले की कुछ घटनाओं को देखे तो बलात्कार में कड़ी सजा, फांसी की मांग, लिंग काटना बहुमत उन घटनाओं में की जाती है जिनमे बलात्कार के बाद लड़की को मार दिया जाता है।

समाज का बहुमत तबका बलात्कार ही उसको मानता है जिसमे रेप के बाद लड़की को मार दिया जाता है।

          अगर लड़की रेप के बाद जिंदा रह गयी तो उसके साथ बलात्कार हुआ ही नही उसके पक्ष में लड़ने की बजाए उसी से 100 सवाल पूछ लिए जाते है। रेप पीड़ित के खिलाफ और रेपिस्ट के पक्ष में अनेको झूठी कहानियां बना दी जाती है। बलात्कार पीड़ित का वीडियो सनी लियोन के पोर्न वीडियो से ज्यादा चाव से देखा जाता है।

हमारे समाज मे बलात्कार के बाद महिला और उसका परिवार जिनको समाज की सहानभूति और मद्दत की जरूरत होती है इसके विपरीत पूरी उम्र जहालत की जिंदगी जीने पर मजबूर हो जाता है। बलात्कार के बाद लड़की को या तो बलात्कारी मार देते है अगर जिंदा बच गयी तो उसको हमारा समाज तिलतिल कर मारता है।

जैसे ही खबर आई कि हैदराबाद में प्रियंका रेड्डी की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गयी उसके बाद से उसको पोर्न साइट पर 80 लाख लोगों ने सर्च किया है। उसमे से लाखो सर्च करने वाले ऐसे भी रहे होंगे जो रेपिस्टों को फांसी हो! फांसी हो! चिल्ला रहे है।

क्या सर्च कर रहे हैं ये 80 लाख यूजर्स

ऐसा वीडियो, जिसमे 4 वहसी जानवर एक महिला को कैसे नोच रहे है? या कुछ ओर

सायद वो तलास कर रहे है एक ऐसा वीडियो जिसमे 4 लोगो ने एक महिला से कैसे sex किया। वो वीडियो ढूंढ रहे है ताकि विक्टिम के प्राइवेट पार्ट  देखकर मजा लिया जा सके। ऐसे इंसान क्या भविष्य के बलात्कारी नही है?

हजारो Whatsaap ग्रुप्स में बलात्कार या जबरदस्ती करते हुए के वीडियो दिन-रात घूमते रहते है। जिनको लोग बड़े चाव से देखते है और आगे अपने दोस्तों में सर्कुलेट करते रहते है। पिछले दिनों जब भाजपा के एक नेता की भाजपा की ही महिला नेता के साथ सेक्स वीडियो लिकीज हुई तो अपने आपको प्रगतिशील कहने वाली पार्टी का एक बुद्विजीवी नेता शोशल मीडिया पर भाजपा का विरोध करने के नाम पर उन वीडियो के स्क्रीन शॉट लगा रहा था। उसने पोस्ट डाली की जिसको वीडियो चाहिए वो कॉमेंट में फोन नम्बर छोड़े।

पोस्ट के कमेंट बॉक्स में ऐसी जहालत का विरोध करने की बजाए हजारो लोगो ने फोन नम्बर उसकी पोस्ट के कॉमेंट में छोड़ दिये। अब मैसेंजर पर कितने हजार उन गुप्त इज्जतदारो ने फोन नम्बर वीडियो पाने के लिए छोड़ा होगा उसकी गिनती बेमानी है। इन सबको क्या कहोगे जो वीडियो पाने की ललक में लार टपका रहे है।

लेकिन इन महापुरूषो का दूसरा चेहरा बहुत ही शरीफ वाला होता है। शोशल मीडिया पर लड़कियों को चंगुल में फंसाने उनको प्रभावित करने के लिए बलात्कारियों को फांसी हो, कड़ी सजा, महिला सुरक्षा, रेपिस्ट का लिंग भंग की मांग करते रहते है।

बलात्कार पीड़ित जब कही से गुजरती है तो लोग उसको इस नजर से देखते है जैसे सारा दोष उसी का है। उसके शरीर को कपड़ो के अंदर से, अपनी गन्दी आंखों से स्केन करके कल्पनाओं में उस मंजर को याद करते है कि कैसे उन लोगो के साथ इसने सेक्स किया होगा। अगर पीड़िता का वीडियो मार्किट में है तो लड़की जितने चाहे कपड़े पहन लें लड़की उनको नंगी ही दिखेगी। बहुमत लोग उस महिला के साथ कल्पनाओं में यौन सम्बन्ध तक बना लेते है।

हर गली, चौराहे, नुक्कड़ पर उसका हर पल बलात्कार होता रहता है। उसको इंसाफ मिले ये तो काल्पनिक सोच है।

आपको सायद याद हो इसी से दुखी होकर उन्नाव रेप पीड़ित ने सार्वजनिक बयान दिया था कि क्या इंसाफ के लिए मुझे मरना पड़ेगा।

साम्प्रदायिक विचारधारा

साम्प्रदायिक विचार धारा से ग्रसित लोग ऐसी प्रत्येक घटना को धार्मिक रंग चढ़ाने की कोशिश में रहते है ताकि साम्प्रदायिक धुर्वीकरण करके अल्पसंख्यको को निशाना बनाया जा सके। भारत में साम्प्रदायिक पार्टी भाजपा और उसके संघठन ऐसी प्रत्येक घटना को अपने गन्दे नजरिये से हिन्दू बनाम मुस्लिम बनाने में लगे रहते है इसके लिए उनके पेड वर्कर शोशल मीडिया पर हर पल झूठ फैलाते रहते है।

लेकिन इसके उलट अगर लड़का हिन्दू हो लड़की मुस्लिम हो जैसे जम्मू के कठवा में जब एक 7-8 साल की दलित मुस्लिम लड़की से जब मंदिर में बलात्कार होता है जिसमे मंदिर का पुजारी और उसका भतीजा शामिल होता है। जिसमे लोकल पुलिस के कुछ अधिकारी भी शामिल होते है। तो ये ही राष्ट्रवादी पार्टी पूरे देश मे बलात्कारी के समर्थन में तिरंगा लेकर धरने-प्रदर्शन करती है। क्योंकि पीड़ित लड़की मुस्लिम है और बलात्कारी हिन्दू है।

ऐसे ही जब उत्तर प्रदेश के उन्नाव में भाजपा का विधायक बलात्कार का आरोपी होता है और पीड़ित लड़की दलित समाज से होती है। ये ही साम्प्रदायिक पार्टी विधायक के समर्थन में धरने-प्रदर्शन करती है।

धार्मिक बाबाओं के अंधे अनुयायी

आसाराम, राम रहीम जैसे दर्जनों धार्मिक बाबा जो बलात्कार के आरोप में जेल में बंध है या उन पर केस चल रहे है। उनके  लाखो अनुयायी, उनके समर्थन में आज भी धरने-प्रदर्शन करते रहते है। मजबूती से इन धार्मिक बाबाओ के समर्थन में और रेप विक्टिम के खिलाफ बोलते रहते है।

 बलात्कारी फोर्स के जवानों का समर्थन करती सरकार

देश के अलग-अलग हिस्सों में जहाँ जनता असन्तोष की वजह से सत्ता के खिलाफ लड़ रही है। उन हिस्सों में फोर्स के द्वारा बलात्कार किये गए। उन फोर्स के जवानों को सजा देने की बजाए देश की सत्ता उनको बचाने के लिए कोर्ट में केस लड़ती है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी जिसके साथ अमानवीयता की हद पार कर दी गयी, जिसकी योनि में पत्थर भर दिए गए। ये सब अमानवीय कृत्य पुलिस अधिक्षक ने थाने के अंदर अंजाम दिए। सरकार ने पुलिस अधिक्षक को सजा देने की बजाए वीरता का मैडल दिलवाया।

 मीडिया

मीडिया जो अपने आपको लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहता नही थकता वो ही इस लोकतंत्र को मारने पर तुला हुआ है। वो सत्ता के इशारे पर लोकतंत्र को बर्बर समाज की तरफ ले जाना चाहता है। वो लोगो को भीड़तंत्र बनाने के लिए प्रत्येक वो खबरे प्लांट कर रहा है जो देश की सत्ता चाहती है। मीडिया जिसका मुख्य काम समस्या क्यो पैदा हुई, उसका समाधान क्या हो। इस मुद्दे पर व्यापक काम करने की बजाए। इस केस को भी मीडिया हिन्दू-मुस्लिम बनाने में लगी हुई है।

बलात्कार पर अरब देशों की सजाओं का अनुशरण करने की मांग

जब भी बलात्कार पर चर्चा होती है तो बलात्कार की समस्या का समाधान कड़ी सजा के नाम पर फांसी, लिंग काटना या अरब या मुस्लिम देशों की सजाओ का अनुशरण करने के उदाहरण अक्सर दिए जाते है। जहाँ रेपिस्ट को कड़ी और सार्वजनिक जगहों पर सजा दी जाती है।

फांसी जो अपने आप मे ही अमानवीय है जिसको किसी सभ्य समाज में मंजूर नहीं किया जा सकता और न करना चाहिए। रेपिस्ट को आजीवन कारावास मतलब लास्ट सांस तक जेल के शिकंजों में रखा जाना चाहिए।

अरब और मुस्लिम देश में धार्मिक रूढ़िवादी कानूनों का चलन है। इन देशों में महिलाओं के कोई मानवाधिकार नही है। उनके कानून बर्बर समाज के कानून है। हमारे मुल्क के आवाम ने उन मध्युगीन बर्बर समाज को बहुत पीछे छोड़ कर लोकतांत्रिक समाज में कदम रखा हुआ है। वहाँ की महिलाएं लोकतंत्र की तरफ बढ़ना चाहती है। इसलिए अरब के कानूनों को लागू करने की मांग बर्बर मांग है जिसको कभी न्यायोचित नही ठहराया जा सकता है। हमको हमारी समस्याओं के समाधान के लिए हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही पीछे देखने की बजाए आगे की तरफ देखकर हल ढूंढना पड़ेगा। कितने ही प्रगतिशील मुल्क, सभ्यताएं है जहाँ ये समस्या बहुत कम है। हमको उन मुल्कों की सभ्यताओं से सीखना चाहिए।

देश का बहुमत तबका बलात्कार में अपना पक्ष तय करने के लिए रेप विक्टिम की जाति, धर्म, इलाका देखता है। अगर लड़की दलित, आदिवासी, मुस्लिम है तो बहुमत तबका पीड़ित के साथ खड़ा होने की बजाए रेपिस्ट के साथ खड़ा होता है। अगर रेपिस्ट गलती से मुस्लिम है तो साम्प्रदायिक पार्टियां और उनके संघठन बलात्कारी को आरोपित करने की बजाए पूरे मुस्लिम धर्म को ही रेपिस्ट साबित कर देते है।

बलात्कार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए सबसे पहले हमको बलात्कारी मानसिकता के खिलाफ जागरूकता अभियान सॉर्ट टर्म भी और इसके साथ-साथ लांग टर्म अभियान चलाना पड़ेगा। बलात्कारी मानसिकता जिसकी जड़ पुरुषवादी समाज है इस पर हमला करना बेहद जरूरी है। जिस समाज मे महिला को पैदा होने से मरने तक इंसान नही समझा जाता, महिला को दोयम दर्जे का समझना, कमजोर समझना, इंसान मानने की बजाए वस्तु मानना, ऐसे समाज मे पला-बढ़ा आदमी महिला को सम्मान देने की बजाए उस पर हमला ही करेगा। इसलिए सबसे जरूरी है सामाजिक ढांचे में बदलाव करके समानता पर आधारित समाज बनाना।

Sex education की शिक्षा को लागू किया जाना चाहिए। सरकार को चाहिए कि बलात्कार के आरोप में जेल में बंद बलात्कारी को साइकेट्रिस्ट की टीम काउंसलिंग करे। ताकि ये पता लगाया जा सके उसकी बलात्कारी मानसिकता के पीछे क्या कारण है ताकि भविष्य में ऐसी मानसिकता के खिलाफ काम किया जा सके। हमको जाति, धर्म, इलाका, देश को नजरअंदाज करके निष्पक्ष होकर बलात्कारी के खिलाफ और पीड़ित के पक्ष में ईमानदारी से खड़ा होना चाहिए।

प्रेषक:

Udey Che

9992801185


source https://krantibhaskar.com/rape-and-society-view/

देश के नौजवानों के नाम खुला पत्र

देश के नौजवानों के नाम खुला पत्र

प्यारे नौजवान साथियों,

आज हमारा प्यारा मुल्क बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहा है। पूरे देश मे अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। एक चिंगारी से पुरा मुल्क जलने के लिए तैयार बैठा है। देश का बहुसंख्यक हिन्दू अल्पसंख्यक मुस्लिम को शक की नजर से देख रहा है। अल्पसंख्यक मुस्लिम डर के साये में जीने पर मजबूर है। मुल्क के ये हालात सत्ता द्वारा लोगो को धर्म-जात-क्षेत्र के नाम पर बांटने की नीति अपनाने की वजह से बने हुए है। फासीवादी विचारधारा हमारी सांझी विरासत को तहस-नहस करने की लिए प्रयासरत है। धारा 370 का खात्मा, CAA और NRC जैसे कानून इसी  फुट डालोराज करो नीति का हिस्सा है।

सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ प्रगतिशील जनता सड़को पर धरना-प्रदर्शन कर रही है। देश का छात्र सत्ता के जुल्म सहते हुए ललकार रहा है। इसके विपरीत सत्ता द्वारा तैयार की गई अंधभक्तो की एक बड़ी फ़ौज सत्ता के इसारे पर जन विरोधी फैसलों के पक्ष में धरने प्रदर्शन कर रही है। वही ये फ़ौज उन लोगो पर या प्रदर्शनों पर हमले भी कर रही है, जो सत्ता के खिलाफ बोलने के लिए मुँह खोल रहे है। ये अंधी फ़ौज सत्ता के इशारे पर तोड़-फोड़ भी कर रही है। सत्ता के आदेश पर वो हत्याएं भी कर रही है। इस अंधभक्तो की फ़ौज में 90 प्रतिशत नौजवान ही है।

फ्री नेट डेटा से लैस नफरत फैलाता नफरत ग्रहण करता अंधभक्त नौजवान

हिंदुत्त्वादी संगठनो द्वारा लम्बे समय से  चलाए जा रहे झूठे प्रचार जिसमे मीडिया व शोशल मीडिया ने एक बड़ी भूमिका निभाई, जिसके अथक प्रयासों से मुल्क को तोड़ने वाली अंधभक्तो की फ़ौज तैयार हुई। ये अंधभक्तों की फ़ौज जो हॉलीवुड के किरदार जॉम्बी की तरह काम करती है। जो अपने आका के कहने के अनुसार काम करती है। जिनको खून पीना, मांस नोचना पसन्द है। जो इंसानो को मार कर खुशी में नृत्य करते है।

जिन नौजवानों को देश की समस्याओं पर लड़ना चाहिए। जिन नौजवानों को मजदूर की मेहनत, किसान की किसानी, अच्छी और मुफ्त शिक्षा-स्वास्थ्य, रोजगार के लिए लड़ना चाहिए। जिन नौजवानों को हमारे पूर्वजों द्वारा अर्जित की गई सार्वजनिक उपक्रमो व जल-जंगल-जमीन-पहाड़ को बचाने के लिए लुटेरी कार्पोरेट जमात और सत्ता के खिलाफ लड़ना चाहिए। लेकिन अफसोस बहुमत नौजवान इन मुद्दों पर लड़ने की बजाए इन मुद्दों के खिलाफ सत्ता के लिए अंधभक्तो की फ़ौज में शामिल है।

देश का किसान जो लम्बे समय से खेती के घाटे में रहने से आत्म-हत्या कर रहा था उसकी आत्महत्या की रफ्तार कछुए से खरगोश हो गयी है। फसल पर लागत मूल्य बढ़ रहा है जबकि फसल के दाम बढ़ने की बजाए कम हो रहे है। किसान का प्याज एक रुपये में दो किलो, आलू एक रुपये में चार किलो बिकता है। लेकिन बाजार में मंहगा आलू-प्याज सबको रुलाता रहता है।

देश का प्राइवेट संघठित क्षेत्र का मजदूर जो अपने आपको मजदूर नहीं कर्मचारी कहलवाना पसन्द करता था मजदूर बोलना उनको गाली लगता था। जिसको महीने में एक तयशुदा वेतन मिलता था। साल में बोनस मिलता था। उसको लग रहा था की उसकी जिंदगी तो अच्छे से गुजर जाएगी। समस्याएं वहाँ भी थी पक्का, कच्चा, ठेके का मजदूर जो संघर्ष कर रहा था लेकिन फिर भी हालत इतने खराब नही थे जितने 2014 के बाद राम राज्य आने के बाद हुए। इस दौरान लाखो की तादात में मजदूरों की नोकरी गयी है।

सरकारी कर्मचारी तो अपने आपको कर्मचारी भी कहलवाना पसन्द नही करता था। वो तो खुद को सरकार समझ रहा था। छटनी के डर से सहमा हुआ है।

इसके विपरीत असंघठित क्षेत्र का मजदूर जो सुबह चौक पर खड़ा होकर अपने श्रम की बोली लगवाता है जिसकी हालात दयनीय थी। जिसको कभी किसी ने इंसान ही नही माना। उसके हालात और भी ज्यादा गर्त में गए है। रोटी-कपड़ा-मकान, शिक्षा-स्वास्थ्य अब सपनो में भी नही मिलता है।

इसके साथ ही एक नया मजदूर उभरा है जो पढा-लिखा है। जो महानगरों में उबेर-ओला  में अपनी गाड़ी लगाये हुए है या  सवेगी-जोमैटो में डिलवरी बॉय का काम करके सरकार व कम्पनी के हाथों लूट रहै है। 14 से 16 घण्टे काम करने के बाद भी हालात यहाँ खड़े है की उसको महीने के दस हजार भी नही बचते हैं। न कोई छुट्टी न कोई आराम।

इसके बाद भी ये नौजवान अपने हक अपनी मेहनत को लूटने वाली कम्पनी व सरकार के खिलाफ लड़ने की बजाए सत्ता का हथियार बन सुबह-शाम मुल्क के अल्पसंख्यक मुस्लिमो, कश्मीरियों या पाकिस्तान को गाली देकर उनको अपना दुश्मन मानकर खुश हो लेता है। जैसे उनके बुरे दिनों के लिए सत्ता नही अल्पसंख्य मुस्लिम, कश्मीरी या मुस्लिम ही जिम्मेदार है।

मध्यम वर्ग जिसमे छोटा पूंजीपति, दुकानदार, IT सेक्टर में काम करने वाला मजदूर, उच्च सरकारी कर्मचारी जो 2014 में मोदी सरकार को लाने में अहम भूमिका में था। जो अंधभक्त बनने की पहली कतारों में शामिल था। उसके आंखों से अंधभक्ति का चश्मा जरूर उत्तर गया है। वो खुल कर तो नही लेकिन दबी जुबान सत्ता की जनविरोधी नीतियों खासकर अर्धव्यवस्था की मौत पर जरूर खिलाफत करने लगा है।

देश के नौजवानों को 2014 का चुनावी शंखनाद याद करना चाहिये। जनता जो कॉग्रेस के मंहगाई, कुशासन और भ्र्ष्टाचार से दुखी थी। पूरे देश मे उनके खिलाफ लोग सड़कों पर थे।

देश के आवाम की भावनाओ को भांप कर फासीवादी भाजपा और उसके नेता नरेंद्र मोदी ने जनता को वादा किया कि हमारी सरकार आते ही सबसे पहली मीटिंग में पहला काम देश के अन्नदाता का कर्जा माफ किया जाएगा। फसल का दाम दोगुना किया जाएगा व लागत मूल्य घटाया जाएगा। प्रत्येक साल 2 करोड़ रोजगार नौजवानों को दिया जाएगा। सबका साथसबका विकास, अच्छे दिन जैसे लोक लुभावन वादे किए गए।

दूसरा सबसे बड़ा वादा काला धन वापिस लाने का किया गया। काला धन जिसको बाबा रामदेव ने लाखों करोड़ बताया। वादा किया गया कि सरकार बनने के 100 दिन के अंदर काला धन वापिस आ जायेगा। वापिस आते ही प्रत्येक भारतीय के हिस्से में 15-15 लाख आएंगे।

जनता कल्पनाओं में खो गयी। काला धन आएगा 15-15 लाख मिलेंगे। इन रुपयों से चमकदार मकान, लक्जरी गाड़ी, ब्रांडेड कपड़े

इन्ही कल्पनाओं में खोए-खोए मुल्क के आवाम ने देश की गद्दी पर फासीवादी पार्टी को प्रचंड बहुमत से बैठा दिया।

सरकार बन गयी। राजा गद्दी पर बैठ गया। जब मुल्क के अलग-अलग हिस्सों से किसान कर्ज माफी की आवाज उठने लगी तो सरकार द्वारा बनाई गई अंधभक्तो की फ़ौज ने बोला कि 15 लाख मिल जायेंगे तो कर्ज माफी का क्या करोगे। बस 15 लाख आने वाले ही है।

जब रोजगार की मांग की गई तो हमारे राम राज्य के सत्तासीन राजा नरेंद्र मोदी ने कहा कि सड़क पर रहेड़ी लगा कर पकोड़े बेचना भी एक बड़ा रोजगार है। देश के नौजवानों को पकोड़े भी बेचने चाहिए।

जब काला धन लाने का क्या रहा पूछा तो बोला गया देश द्रोहियो से निपट ले उसके बाद आ जायेगा। लोग अच्छे दिनों को एड़िया उठा-उठा कर देख रहे थे तभी एक रात साहब टेलीविजन पर अवतरित हुए और बड़े ही क्रांतिकारी अंदाज में नोटबन्दी की घोषणा कर दी। साहब ने बोला कि ये कालेधन लाने की पहली सीढ़ी है। देश के अंदर जो लुटेरे पूंजीपतियों और उनके साझेदार नेताओ ने जो काला धन मुल्क में ही छुपाया हुआ है वो इस नोटबन्दी से बाहर आ जायेगा। साहब बोले जा रहे थे लोग सुन रहे थे।

साहब बोल रहे थे, मेरे मुल्क के मेहनतकश 80 प्रतिशत आवाम को डरने की जरूरत नही है। इस फैसले से 20 प्रतिशत लुटेरे को डरना चाहिए। देश के आवाम को देश हित मे ये कड़वी दवा पीनी पड़ेगी ताकि हमारे मुल्क का भविष्य उज्वल हो सके। अगले दिन से बैंकों के आगे लम्बी-लम्बी लाइने लग गयी। लाइनों में लगे लोग खुश थे। आपस मे खुसर-फुसर कर रहे थे कि अब लुटेरों को नानी याद आ जायेगी। दिन बीते, महीने बीते बीत गयी 5 साल लेकिन लुटेरा पूंजीपति को नानी याद नही आई। नानी याद देश के बहुमत 80 प्रतिशत आवाम को जरूर आ गई। सैंकड़ो लोग लाइनों में खड़े-खड़े स्वर्ग को प्रस्थान कर गए। कितनी लड़कियों की शादियां रुक गयी। देश की अर्धव्यवस्था कोमे में चली गयी। देश के अंदर छोटी बड़ी लाखो फैक्ट्रियां बन्द हो गयी। लाखो लोग बेरोजगार हो गए। लोगो के एक तबगे ने सरकार के खिलाफ बोलना शुरू किया तो सत्ता के द्वारा बनाई गई नौजवानों की अंधभक्त फ़ौज लोगो के खिलाफ ही प्रचार करने लगी। तमिलनाडु के किसानों ने दिल्ली आकर नंगा होकर प्रदर्शन किया या लाखो की तादात में देश के अलग-अलग हिस्सों से किसान-मजदूर दिल्ली आकर प्रदर्शन कर रहे थे। उसी समय वो अंधभक्तो की भीड़ शोशल मीडिया, मीडिया से लेकर सार्वजनिक जगहों, क्लबो में सक्रिय होकर इन आंदोलनों को बदनाम करने के लिए सभी तरीके अपना रही थी। आंदोलनकारियों को देश द्रोही, अर्बन नक्सल, पाकिस्तान परस्त बोला जा रहा था।

चुनाव में किये गए वादे पूरे करने की मांग करना भी अब देश द्रोही हो गया।

इसके विपरीत सत्ता द्वारा देश का बड़ा कार्पोरेट लाखो करोड़ रुपये डकार कर फरार किया गया। ताकि भविष्य में उनसे चुनावी खर्च लिया जा सके

नोटबन्दी के बाद GST जिसने भारत की कोमे में जा चुकी अर्धव्यवस्था का गला रेतने का काम किया।

भारतीय सत्ता जो फासीवादी विचारधारा से लैस जिसने सविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को ध्वस्त करने के लिए CAA और NRC जैसे काले कानून लागू कर रहा है। भारतीय सविधान द्वारा कश्मीर को धारा 370 के अंतर्गत दिया गया विशेष दर्जा गैर लोकतांत्रिक तरीके से हटाया जाना, आदिवासियों के सवैधानिक अधिकारों का हनन, या नार्थ ईस्ट स्टेट के अधिकारों को कुचलना भविष्य में मुल्क को गृह युद्ध की तरफ धकेल रहा है। सत्ता लोगो को लड़ाकर पिछले दरवाजे से जल-जंगल-जमीन-पहाड़-खान व सार्वजनिक उपक्रमो को कार्पोरेट को नमक के भाव में देना चाहती है।

लेकिन देश का बहुमत नौजवान अब भी मोदी और मोदी के राम राज्य की जय जयकार कर रहा है।

नौजवान साथियों क्या इस बुरे दौर में जब देश के हालात बहुत नाजुक है। उस समय देश के नौजवानों को जनता की जन समस्याओं पर लड़ने की बजाए। क्या जनता के खिलाफ लड़ना चाहिए? सत्ता की जन विरोधी नीतियों का विरोध करने की बजाए क्या सत्ता के सामने नतमस्तक हो जाना चाहिए?

आज मुल्क के नौजवानों के सामने दो रास्ते है। शहीद-ऐ-आजम भगत सिंह का रास्ता जिसने 23 साल की उम्र में देश के क्रांतिकारी आंदोलन को एक नई दिशा दी। मेहनतकश आवाम की समाजवादी सत्ता की बात की, धर्मनिरपेक्ष देश की बात की, धर्मइलाकाजाति के नाम पर एक इंसान दूसरे इंसान का शोषण करे, आजाद मुल्क में सबको शिक्षास्वास्थ्य मिले सामंती और साम्राज्यवादी शक्तियों का विनाश हो। जिसने अंग्रेजी साम्रज्यवाद की आंखों में आंख डाल कर ललकारा, जिसने फाँसी को हंसतेहंसते गले लगाया।

          दूसरा रास्ता माफिवीर और अंग्रेजो की पेंशन पर पलने वाले धर्मनिरेपक्षता विरोधी विनायक दामोदर सावरकर का है। जिसने सजा मिलते ही अंग्रेज सरकार के आगे घुटने टेक दिए। जिसने अपनी अंतिम सांस तक सामंती और साम्राज्यवादी सत्ता के लिए काम किया। जिसने बराबरी धर्मनिरपेक्षता की विचारधारा के विपरीत असमानता पर आधारित धार्मिक राज्य बनाने के लिये काम किया।

हमारे मुल्क की खूबसूरती हमारी सांझी संस्कृति में ही है नफरतों में नही

सही रास्ते का चुनाव आपको करना है। ऐसा मुल्क जिसमे सबको बराबरी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, मेहनतकश को उसकी पूरी मेहनत का दाम मिले, कमजोर तबके को विशेष रियायत मिले। हमारे प्राकृतिक संसाधनो की लूट बन्द हो। एक शांत और सामूहिक आवाम के लिए उन्नति करता पूरे विश्व को रास्ता दिखाता मुल्क हो या जात-धर्म-क्षेत्र के नाम पर खून बहाता, लुटा-पीटा गुलाम मुल्क

          फैसला आपको करना है कौनसा रास्ता चुनते हो। क्योंकि भविष्य आपका और आपकी आने वाली नश्लो का आपके हाथों में है।

प्रेषक:

Uday Che

9992801185



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देश के प्रगतिशील बुद्विजीवियों ने सत्ता के सविधान विरोधी कानून के खिलाफ लिखे पत्र के मायने

देश के प्रगतिशील बुद्विजीवियों ने सत्ता के सविधान विरोधी कानून के खिलाफ लिखे पत्र के मायने

विशेष।

एक बार फिर देश के 600 प्रगतिशील बुद्विजीवियों (कलाकारों, शिक्षाविदों, नाटककारों) ने भारतीय सत्ता को एक पत्र लिख कर चेताया है कि उसके द्वारा नागरिकता संसोधन बिल (कैब) जो अब कानून बन चुका है जो भारतीय सविधान की मूल भावना धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है। आपके इस कानून से सविधान की मूल भावना धर्मनिरपेक्षता का खात्मा सम्भव है। जिन्होंने अपने पत्र में सरकार को लिखा है कि- हम सरकार से संविधान से खिलवाड़ नहीं करने की मांग करते हैं। देश में समानता के संवैधानिक संकल्प का सम्मान किया जाना चाहिए। इसीलिए हम सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग करते हैं।

इन 600 प्रगतिशील बुद्विजीवियों में योगेंद्र यादव, इतिहासकार रोमिला थापर, आनंद पटवर्धन, हर्ष मन्दर, अरुण रॉय, तिस्ता सीतलवाड़, बेजवाडा विल्सन, दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एपी शाह और देश के पहले मुख्य सूचना आयुक्त जस्टिस वजाहत हबीबुल्ला ने भी इस पर दस्तखत किए हैं।

समाजिक ढांचे में 2 पक्ष होते है जो समाज को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रगतिशील राजनीतिक पार्टी और प्रगतिशील बुद्विजीवी

प्रगतिशील राजनीतिक पार्टी

देश के अंदर प्रगतिशील पार्टियों की बात करे तो बसपा जो डॉ भीम राव अम्बेडकर की विचारधारा की वारिस होने का दम्भ भरती है। डॉ अम्बेडकर जिन्होंने भारत का सविधान लिखने में अहम भूमिका निभाई। जिनके प्रयासों से देश का सविधान धर्मनिरेपक्ष बना। लेकिन बसपा ने कैब पर राज्य सभा मे वोटिंग के समय वाक आउट करके पिछले दरवाजे से इस कानून बनाने में सत्ता का साथ दिया। इससे पहले भी कई अवसरों पर मायावती फासीवादी विचारधारा का समर्थन कर चुकी है। सत्ता द्वारा धारा 370 का अलोकतांत्रिक तरीके से खात्मे का भी बसपा समर्थन कर चुकी है। बसपा के कार्यो से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो कितनी डॉ अम्बेडकर के वारिस है।

समाजवादी मुलायम लाल टोपी वाले का समाजवाद भी फासीवादी सत्ता के आगे बहुत बार नतमस्तक हो चुका है। पिछले दिनों संसद में भारत के हिटलर की तारीफ और उनकी सत्ता में वापसी की दुआएं वो सार्वजनिक मांगते देखे गए है।

सी.पी.एम. और उसके सांझेदार सत्ता की जन विरोधी फैसलों पर जरूर आवाज उठाते रहे है लेकिन संशोधनवाद के कारण इनका दायर भी सीमित होता जा रहा है। इनका कैडर वैचारिक दरिद्रता के कारण जाने-अनजाने बहुत से मौकों पर फासीवादी सत्ता के पक्ष में खड़ा दिखता है। लोकसभा चुनाव में इनका बहुमत कैडर बंगाल भाजपा के समर्थन में मजबूती से खड़ा था वही केरल में शबरीमाला मंदिर मसले पर धर्म के तराजू के नीचे दबकर अपने विचारों का कत्ल वहाँ की पार्टी कर चुकी है। फासीवाद के खिलाफ कोई मजबूत जन आन्दोलन खड़ा करने में कमजोर ही साबित हुए है।

कॉग्रेस और उसके सांझेदार फासीवादी सत्ता के खिलाफ कोई मजबूत लड़ाई का मंच तैयार करेंगे ये सोचना ही मूर्खता है। उसके अवसरवादी रैवये, भ्रष्टाचार, वैचारिकता से किनारा करने के कारण भारत की बहुमत जनता उनसे किनारा कर चुकी है। इनके खत्म होते जन आधार के कारण ही जनता  फासीवादी विचारधारा के चंगुल में फंस कर सत्ता की व उनकी सविधान विरोधी फैसलों की समर्थक बनती जा रही है।

प्रगतिशील बुद्विजीवी

प्रगतिशील बुद्विजीवी जो समाज को आगे बढ़ाने में व सत्ता को जन विरोधी फैसलों के खिलाफ चेताने व रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं।

देश के अंदर फासीवादी सत्ता के खिलाफ ईमानदारी से सत्ता के जनविरोधी फैसलों को रोकने व एक आधार बनाने का काम बुद्विजीवियों और वामपंथियों ने दिया है। 2014 से पहले और 2014 में सत्ता में आने के बाद जिस तरह से फासीवादी संघठनो ने विरोध की आवाज दबाने के लिए डाबोलकर, प्रो. कलबुर्गी, कामरेड पंसारे, रोहित वेमुला, पत्रकार गोरी लंकेश, पहलू खान, जुनैद की हत्याएं की, नजीब को गायब किया गया, आंदोलनकारियो पर हमले किये गए। सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया। ट्रोल किया गया। इन सब मुद्दों पर देश के प्रगतिशील कलाकारों, शिक्षाविदों, रंगकर्मियों, नाटककारों, पत्रकारों, लेखकों ने मजबूती से सत्ता और उसके संघठनो का विरोध किया। धरने-प्रदर्शन, पत्र लिखना, आवार्ड वापसी, सेमिनार के माध्यम से जनता को राह दिखाने और एकजुट करने में बुद्विजीवियों ने अहम भूमिका निभाई।

 

नागरिकता संशोधन बिल उन लाखों क्रांतिकारियों की सहादत के खिलाफ है जिन्होंने अपनी सहादत एक ऐसे आजाद मुल्क के लिए दी जो धर्मनिरपेक्ष समाजवादी होगा।

देश की आजादी का आंदोलन जो हिन्दू-मुस्लिम एकता के साथ लड़ा गया। जिनका सांझा दुश्मन साम्राज्यवादी अंग्रेज सत्ता थी। आजादी के आंदोलन में रामप्रसाद बिस्मिल और असफाक की सहादत ऐसे ही मुल्क की नींव के अंदर पत्थर का काम कर रही है। गदर पार्टी के योद्धा, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चन्द्रशेखर आजाद, सुभाष चन्द्र बोष, महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, डॉ भीम राव अम्बेडकर, शेख अब्दुल्ला और लाखों क्रांतिकारियों का एक ही सपना था एक ऐसे आजाद मुल्क की स्थापना जिसमे धर्म-जाति-इलाका के नाम पर भेदभाव न हो।

इसके विपरीत संघ व हिन्दू महासभा जो हिंदुत्त्ववादी राजनीति झंडा उठाकर और मोहम्मद अली जिन्ना मुस्लिम लीग बनाकर देश के आजादी आंदोलन के खिलाफ अंग्रेजो का साथ दे रहे थे। जो देश को धर्म के नाम पर बंटवारे के पक्षधर थे। नाथू राम गोड़से द्वारा महात्मा गांधी की हत्या इसी धार्मिक मुल्क बनाने के लिए की गई आंतकवादी कार्यवाही थी।

देश आजाद होते ही सत्ता की बागडोर देश के गद्दारो के हाथों में जाने की बजाए क्रांतिकारी खेमे की तरफ आयी। इसी खेमे के अथक प्रयासों से देश का सविधान धर्मनिरपेक्ष बना। हमारे सविधान की प्रस्तावना कहती है कि-

हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को:सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए,

तथा उन सब में,

व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित कराने वाली, बन्धुता बढ़ाने के लिए,

दृढ़ संकल्पित होकर अपनी संविधानसभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ईस्वी (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हजार छह विक्रमी) को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।

वर्तमान में बना नागरिकता कानून (कैब) सविधान की मूल भावना के साथ-साथ भारत की सांझी संस्कृति, भारत का क्रांतिकारी आंदोलन, सूफी व निर्गुण काव्यधारा के सन्त आंदोलन के खिलाफ है।

इसलिए भारत के आवाम को आने वाली नश्लो को एक सभ्य, मानवीय और समाजवादी मुल्क बनाने के लिए इस कानून का मजबूती से विरोध करना चाहिए। अगर हम आज नही विरोध करेंगे तो वो दिन दूर नही जब हमारे मुल्क का भी वैसा ही हाल हो जाएगा जैसा हिटलर की तानाशाही सत्ता जो लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बहुमत से सत्ता में आई थी जिसका परिणाम जर्मनी का विनाश और हर घर मे मौत हुआ था।

प्रेषक:

Uday Che

9992801185



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भारत की जनता के नाम खुला पत्र

भारत की जनता के नाम खुला पत्र

प्यारे देश वासियों:आप सभी स्वस्थ और खुश होंगे ऐसी कामना करता हूँ। लेकिन अफसोस आप न स्वस्थ हो और न खुश हो। क्योकि भारत बीमार लोगो का घर बनता जा रहा हैं। बीमार आदमी खुश रह ही नही सकता है।

ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए किसान से लेकर उद्योगपति तक सब प्रकृति से इतनी छेड़छाड़ करते है जिससे हम बीमारी के घर मे तब्दील होते जा रहे है। वो सब बीमारी ठीक होती, उससे पहले बहुमत देश के आवाम को मानसिक बीमारी ने घेर लिया।

ये मानसिक बीमारी बहुत ही खतरनाक है जिसका समय पर इलाज न हो तो मौत व्यक्ति की ही नही, मानवता की भी मौत मुमकिन है। इस मानसिक बीमारी के कारण अब आपकी आंखों को खून देखना अच्छा लगने लगा है। आप उस भीड़ का हिस्सा बनते जा रहे हो। जिसकी मानवता मर चुकी है। अब आप गुस्सा होते हुए मना करोगे की हमको ये बीमारी है ही नही और हम मानसिक तौर पर स्वस्थ है। लेकिन आप बीमार हो। आपकी बीमारी के लक्षण खुले मैदान में दिख रहे है। फिर भी आप नही मान रहे हो की आप बीमार हो तो

मैं आपका ध्यान हैदराबाद पुलिस द्वारा बलात्कार के आरोप में पकड़े गए 4 आरोपियों के कत्ल की तरफ दिलाना चाहता हूं। जिसको हैदराबाद पुलिस मुठभेड़ बता रही है। बलात्कार जो एक जघन्य अपराध है। जिसमे सख्त सजा होनी चाहिए। इस केस में भी आरोपियों को सख्त सजा होनी चाहिए थी। लेकिन ये सजा न्यायालय के द्वारा वैध कानूनी तरीके से होती। लेकिन पुलिस ने इससे पहले ही इन 4 आरोपियों का कत्ल करके न्यायालय को सन्देश दे दिया गया कि अब न्यायालय भी हम और जज भी हम है। पुलिस द्वारा ये कत्ल इन 4 बलात्कार के आरोप में पकड़े गए आरोपियों का नही किया गया है, कत्ल किया गया है आपके पूर्वजो के उस संघर्ष का जिसकी बदौलत हम बर्बर समाज से लोकतांत्रिक प्रणाली में आये। कत्ल किया गया भारतीय कानून व्यवस्था का, कत्ल किया गया है हमारी आने वाली नश्लो के भविष्य का

पुलिस जिसका काम लोकतांत्रिक प्रणाली में अपराध होने से रोकना और अपराध होने के बाद अपराधी को पकड़ कर न्यायालय के सामने पेश करना है। दोषी को सजा दिलाने के लिए मजबूती से पुख्ता सबूत ढूंढना और सबूतों को न्यायाधीश के सामने पेश करना है ताकि कोर्ट में बैठा न्यायाधीश सबूतों के आधार पर अपराधी को उसके अपराध के अनुसार सजा दे सके।

लेकिन अब तक पुलिस अपने इस कार्य में विफल रही है। सबूतों के अभाव में अपराधी छूटते रहे है। अपराधी और पुलिस की मिलीभगत भी जगजाहिर है। इसके विपरीत पुलिस ने निर्दोष लोगों को चोरी से लेकर कत्ल, बलात्कार, आंतकवाद के झूठे केसों में फंसाया है। सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार भी पुलिस में ही है ये भी हम सबको मालूम है।

लेकिन आपको अपनी न्याय प्रणाली पर विश्वास नही है। आप जंगली जानवरों की तरह अपराधी को भीड़ के हवाले करने की मांग कर रहे हो। आप उसको अपने दांतों से फाड़ देना चाहते हो। आप भीड़ के बर्बर कानून पर विश्वास करने लगे हो। उस बर्बर कानून पर विश्वास जिस कानून में बहुमत मेहनतकश जनता का ही उत्पीड़न होता है। इस उत्पीड़न के खिलाफ लड़ते हुए हमारे पूर्वजों ने हमको ये न्याय प्रणाली दी। इसमे बहुत सी खामियां हो सकती है। इन खामियों को दूर करने का काम भी हम सबका है। लेकिन हम सत्ता के झूठे प्रचार में आकर इसको खत्म करके बर्बरता की तरफ लौटना चाहते है। हम अपने हाथों से अपनी और आने वाली नश्लो को गुलामी की तरफ धकेल रहे है।

हैदराबाद पुलिस द्वारा किया गया ये कत्ल भारतीय कानून व्यवस्था को उस बर्बर समाज की तरफ ले जाने की कोशिश का हिस्सा है जिस कोशिश में देश की साम्प्रदायिक फासीवादी विचारधारा लगी हुई है।

बर्बर समाज में राजा ही सविधान है, राजा का आदेश ही कानून है, राजा का फैसला अंतिम है। जहाँ न कोई मानवाधिकार है, न किसी को आजादी है।

इस राजशाही से लड़कर तो हमारे पूर्वज अंधेरे से उजाले में हमको लेकर आये थे। लेकिन हम आज फिर उसी बर्बर समाज में लौटना चाहते है तो ये मानसिक बीमारी नही तो ओर क्या है।

लेकिन आप हो कि इस कत्लेआम पर खुशियां मना रहे हो। आप अपनी न्याय प्रणाली जो पहले के बर्बर समाज से बहुत बेहतर है उस पर विश्वास करने की बजाए पुलिस पर विश्वास कर रहे हो। उस पुलिस पर जो सत्ता के इशारे पर काम करती है। जो चौक पर खड़ी होकर 10 रुपये में बिक जाती है। जो पुलिस ऑटो वालो को किराया न दे, रेहड़ी-पटड़ी वालो, भिखारी, वैश्या से हफ्ता लेती हो। जिसका इतिहास काले धब्बो का इतिहास है। जिसने अनगिनत निर्दोष लोगों का कत्लेआम किया है। जिसने लाखो निर्दोष लोगों को जेल में सड़ाया है। आप उस पर विश्वास कर रहे हो। आप उसको जज बना रहे हो। इससे ज्यादा मानसिक बीमारी क्या होगी।

आपको याद होगा रेयान इंटरनेशनल स्कूल, गुड़गांव का वो केस जिसमे एक बच्चे का कत्ल हो जाता है हमारी पुलिस कत्ल के इल्जाम में स्कूल बस के परिचालक को गिरफ्तार करती है। पुलिस दावा करती है कि उसके पास CCTV फुटेज के साथ-साथ और भी पुख्ता सबूत है। परिचालक को इतनी ज्यादा यातनाएं दी जाती है। यातनाएं देकर उससे कत्ल का कबूलनामा भी करवा लिया जाता है। लेकिन मासूम बच्चे के पिता को विश्वास नही होता उसके नेतृत्व में आंदोलन होता है जांच CBI के सपुर्द की जाती है। CBI जांच में परिचालक निर्दोष और कातिल एक दूसरा बच्चा  निकलता है। उस समय भी बहुमत जनता परिचालक को फाँसी हो! फांसी हो! चिल्ला रही थी।

वो परिचालक आज भी सीधा खड़ा नही हो सकता उसको इतना पीटा गया था।

ऐसे ही हिमाचल में एक छात्रा का गैग रेप होता है। गैग रेप करने वाले अमीर घरों से थे पुलिस उनको बचाने के लिये उन अमीर घरों के लड़कों से मिलीभगत करके एक खेल खेलती है। लड़को के घर में काम करने वाले नेपाली व्यक्ति को रुपये का लालच देकर बलात्कार का आरोपी बनाया जाता है। पुलिस उसको गिरफ्तार करती है उसके बाद थाने में उसकी हत्या की जाती हैं। पुलिस मीडिया को ब्यान देती है कि आत्म-गिलानी में आरोपी ने आत्महत्या कर ली। लेकिन हिमाचल के लोगो को इस पर विश्वाश नही होता वो आंदोलन करते है। आंदोलन के बाद जांच होती है। जाँच में सच्चाई सामने आती है। आज पुलिस के अफसर और बलात्कारी जेल में है।

ऐसे ही 2012 में भारतीय फोर्स द्वारा 17 आदिवासियों की हत्या की जाती है। फोर्स दावा करती है कि 17 माओवादी मुठभेड़ में मारे गए। पूर्व जज की निगरानी में जांच होती है तो सच्चाई सामने आती है कि ये मुठभेड़ झूठी थी। उन 17 ग्रामीणों की हत्या की गई थी।

फोर्स आदिवासी लड़की को घर से उठाती है। उसके साथ सामूहिक रेप करती है। उसके बाद 11 गोलियां मारकर उसकी हत्या कर देती है। हत्या को मुठभेड़ में तब्दील करने के लिए उस आदिवासी लड़की को नक्सलियों वाली वर्दी पहनाई जाती है। एक बन्दूक पास में रखी जाती है। मीडिया का फोटो सेशन होता है। लेकिन कमाल ये था कि उस लड़की के शरीर में 11 गोली के 11 सुराग थे लेकिन उस वर्दी में 1 सुराग भी नही था।

भोपाल जेल मुठभेड़ तो आप सबको याद होगी। जिसमे कैदी लकड़ी की चाबी से जेल के ताले खोल कर, एक जेल गार्ड को मार कर और 20 फुट ऊंची दीवार फांद कर भाग जाते है। जिनको पुलिस सुबह-सुबह मुठभेड़ में मार देती है। हाशिमपुरा का पुलिस जनसंहार भी इस मौके पर याद कर लेना चाहिए। 42 मुस्लिम निर्दोष लोगों को ट्रक में भरकर बस्ती से उठाया, मुरादनगर गंग नहर पर ले जाकर सबको लाइन में खड़ा करके गोलियों से छलनी करके नहर में बहा दिया। पिछली साल पोलिस वालो को सजा हुई। जनता ने तो उस कत्लेआम पर बहुत खुशी मनाई थी क्योंकि पोलिस ने ब्यान जारी करके बोला कि ये सब दुर्दांत आंतकवादी थे।

इन सभी मामलों में बहुमत जनता ने पुलिस का समर्थन किया। लेकिन भारतीय कानून न्याय प्रणाली के हस्तक्षेप से जांच हुई। जांच के बाद सच्चाई सामने आई। इसके साथ ही सामने आया पुलिस का क्रूर चेहरा, जो अपनी ताकत का इस्तेमाल दलित, आदिवासी, मुस्लिम, महिला, किसान के खिलाफ सत्ता के इशारे पर करता रहा है और वर्तमान में भी कर रहा हैं।

पुलिस सत्ता के प्रति वफादार होती है लेकिन न्याय प्रणाली, न्याय व्यवस्था के प्रति वफादार होती है।

इस पूरे खेल के पीछे भारतीय सत्ता है, जिसके इशारे पर ये सब हो रहा है। हैदराबाद कत्ल तो एक फ़िल्म का ट्रेलर है। लेकिन जैसे ही कोर्ट बन्द हो जायेंगे। मानसिक बीमार जनता की मांग पर कोर्ट थानों में लगने लगेगी। थानेदार कोर्ट का जज होगा। जो भी इनकी सत्ता के खिलाफ, इनकी लूट के खिलाफ आवाज उठाएगा उसको कोई भी आरोप लगा कर मुठभेड़ में मार दिया जाएगा। जो लड़की इनके बिस्तर तक जाने के लिए मना करेगी उसके परिवार को या तो जेल में डाल दिया जाएगा या गोली से उड़ा दिया जाएगा। वर्तमान में न्यायालय के होते हुए इन्होंने जब इतना आंतक मचाया हुआ है। सोचो जब थानों में कोर्ट लगेगी। आपको किसी भी फैसले पर अपील करने की अनुमति नही होगी। पुलिस को किसी कोर्ट का डर नही होगा। उस समय क्या मंजर होगा।

आपकी रूह कांप जाएगी सच्चाई जानकर, सच डरावना है लेकिन आपको विश्वास नही  होगा। क्योकि आपने न्याय पालिका के छत्र छाया में खुली सांस जो ली है।

लेकिन कभी कश्मीर के आवाम से पूछना, कभी असम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम के आवाम या छत्तीसगढ़ के आदिवासी से पूछना जहाँ फोर्स को विशेष अधिकार मिले हुए है। कितना तांडव किया है वो आपको अच्छे से बता सकते है बस आपके कलेजे में सुनने की ताकत हो।

चरवाहे से नाराज भेड़ो ने कसाई को चुन लिया

देश की जनता का एक बड़ा हिस्सा इस कत्ल को जायज सिर्फ इसलिए ठहरा रहा है क्योंकि वो न्याय पालिका के देर से मिले न्याय से नाराज है। खूंखार अपराधियो को छूटने से नाराज है। वो जल्दी फैसला चाहते है। लेकिन इसके पीछे के कारणों को जाने बिना न्याय पालिका को दोष देना गलत होगा। सबसे पहले तो देश मे कोर्ट और जजों की भारी कमी है। दूसरा कारण न्याय में देरी औऱ अपराधियो के छूटने के लिए बहुत हद तक पुलिस ही जिम्मेदार होती है जो कोर्ट में सबूत पेश नही करती। चार्ज सीट पेश करने में ही महीनों गुजार देती ये सब अपराधियो से मिलीभगत के कारण ही सम्भव होता है।

देश के अंदर वर्गीय सता है। जिसका नेतृत्व पूंजीवादी औऱ सवर्णवादी तबका कर रहा है। पुलिस सत्ता का अभिन्न अंग है इसलिए पुलिस भी वर्गीय है। इसी वर्गीय आचरण के कारण पुलिस निरंकुश और तानाशाही प्रवर्ति की है।  न्याय पालिका भी वर्गीय है इसमें कोई दोराहे नही लेकिन सत्ता से कुछ स्वतंत्र होने के कारण न्याय पालिका निरंकुश नही है। न्याय पालिका में ओर ज्यादा सुधार करके जो कमियां है वो दूर की जा सकती है। न्याय पालिका पर विश्वास किया जा सकता है। अगर आपको अपना औऱ अपनी आने वाली नश्लो का भविष्य बचाना है तो इन हत्याओं का विरोध कीजिये। पुलिस को जज बनने से रोकिए। भीड़ के न्याय को नकारिये। अगर इसको नही रोका गया तो क्या पता कब आपके अपनो को भीड़ कुचल दे।

प्रेषक:

Udey Che

9992801185



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युवाओं की भूमिका पर ‘मन की बात’

युवाओं की भूमिका पर ‘मन की बात’

विशेष। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देश की युवापीढ़ी के मन को समझने एवं समझाने की कोशिश की। परिवर्तन की लहर विकास की नाव पर सवार है, लेकिन परिवर्तन के बहुरंगी, विविध आयामी पक्षों के बीच जाते हुए वर्ष में युवा-आक्रोश का उभरना या उभारने के षडयंत्रपूर्ण दृश्यों को समझना जरूरी है, ताकि हम समझ पाएं कि आगे बढ़ते देश के निर्माण में युवा सहभागिता कितनी और किस हद तक महत्वपूर्ण है। हाल के राजनीतिक परिदृश्यों ने राममंदिर, अनुच्छेद 370, तीन तलाक कानून, एनआरसी और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए)  की संभावना कोे पूरजोर तरीके से प्रकट किया है और इन मुद्दों पर युवा-सोच भी नये तेवरों के साथ सामने आयी है। युवा-सोच में राजनीति को व्यक्ति नहीं, विचार और विश्वास आधारित बनाना होगा। चेहरा नहीं, चरित्र को प्राथमिकता देनी होगी।

मोदी ने जो कुछ कहा उससे और खासकर इस बात से असहमत नहीं हुआ जा सकता कि आज के युवा व्यवस्था, अनुशासन एवं पारदर्शिता को पसन्द करते हैं और वे न केवल उसका पालन करते हैं, बल्कि यदि सिस्टम ढंग से काम न करे तो सवाल भी करते हैं, रोष भी व्यक्त करते हैं। वास्तव में हम सब भारत की उस युवा पीढ़ी का उभार देख भी सकते हैं जो न केवल नियम-कायदों के हिसाब से चलना पसंद कर रही है, बल्कि यह भी चाह रही है कि अन्य सभी ऐसा करें। राजनीतिक अपराधीकरण, आतंकवाद एवं बेरोजगारी को लेकर सबसे ज्यादा युवा परेशान है, हालांकि आर्थिक और राजनीतिक भ्रष्टाचार की चिंता भी उन्हें परेशान किए हुए है। हमारे देश में सरकारी मशीनरी एवं राजनीतिक व्यवस्थाएं सभी रोगग्रस्त हैं। वे अब तक अपने आपको सिद्धांतों और अनुशासन में ढाल नहीं सके। कारण राष्ट्र का चरित्र कभी इस प्रकार उभर नहीं सका। युवापीढ़ी देश की राजनीति में पारदर्शिता एवं नैतिकता चाहती है, यही कारण है कि नरेन्द्र मोदी की नीतियों को इसी युवापीढ़ी ने सबसे ज्यादा बल दिया एवं पसन्द किया है।

मन की बात में युवाओं से मुखातिब होकर मोदी ने न केवल अपने मन की बात कही बल्कि देश के नवनिर्माण की आवश्यकता व्यक्त की। किसी भी देश की ऐसी युवा पीढ़ी व्यवस्था को बदलने के साथ ही उस माहौल का निर्माण करने में भी सहायक बनती है, जो पुराने ढर्रे को बदलने के लिए आवश्यक होता है। विडंबना यह है कि कुछ लोग और खासकर नेताओं का एक वर्ग अभी भी पुराने ढर्रे पर चलना पसंद कर रहा है। प्रश्न यह भी है कि राजनीतिक दल एवं राजनेता अपने ही युवाओं के जीवन से जुड़े बुनियादी मुद्दों को तवज्जों क्यों नहीं देती? भारतीय राजनीति की यह सबसे बड़ी कमजोरी रही है। शेक्सपीयर ने कहा था- ”दुर्बलता! तेरा नाम स्त्री है।“ पर आज अगर शेक्सपीयर होता तो इस परिप्रेक्ष्य में, कहता ”दुर्बलता! तेरा नाम भारतीय राजनीति है।“ आदर्श सदैव ऊपर से आते हैं। पर शीर्ष पर आज इसका अभाव है। वहां मूल्य बन ही नहीं रहे हैं, फलस्वरूप नीचे तक, साधारण से साधारण संस्थाएं, संगठनों और मंचों तक राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि और नफा-नुकसान छाया हुआ है। सोच का मापदण्ड मूल्यों से हटकर राजनीतिक निजी हितों पर ठहर गया है। राष्ट्रीय चरित्र निर्माण की कहीं कोई आवाज उठती भी है तो ऐसा लगने लगता है कि यह विजातीय तत्व है जो हमारे जीवन में घुस रहा है। यही कारण है कि व्यवस्था में बदलाव और सुधार की कोशिशों का विरोध होते हुए दिखता है। यह विरोध वे लोग करते हैं जो भाई-भतीजावाद, परिवारवाद और अपारदर्शी व्यवस्था के पोषक हैं। इनका बस चले तो वे शायद कोटा-परमिट वाली व्यवस्था को फिर से लागू करने की वकालत करने लगें। सच तो यह है दबे-छिपे स्वरों में यह वकालत होती भी है।

प्रधानमंत्री ने यह सही कहा कि आने वाले दशक को गति देने में वे लोग ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएंगे जिनका जन्म इक्कीसवीं सदी में हुआ है। इससे इन्कार नहीं कि बीते वर्षों में व्यवस्था के स्तर पर काफी कुछ बदला है, लेकिन यह भी सही है कि अभी बहुत कुछ बदले जाने की आवश्यकता है। इस आवश्यकता की पूर्ति में सजग और अनुशासनप्रिय युवाओं की एक बड़ी भूमिका रहने वाली है। कुशलता बढ़ाने पर बेहतर ध्यान देना चाहिए ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा में टिक सकें। सरकार को भ्रष्टाचार दूर करना चाहिए। कर-नीतियों में विषमता की दर कम होनी चाहिए। इस तरह जो अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो उसका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य व सामाजिक सुरक्षा सुधारने के लिए करना चाहिए। क्या देश मुट्ठीभर राजनीतिज्ञों और पूंजीपतियों की बपौती बनकर रह गया है? चुनाव प्रचार करने हैलीकाॅप्टर से जाएंगे पर उनकी जिंदगी संवारने के लिए कुछ नहीं करेंगे। तब उनके पास बजट की कमी रहती है। लोकतंत्र के मुखपृष्ठ पर ऐसे बहुत धब्बे हैं, अंधेरे हैं, वहां मुखौटे हैं, गलत तत्त्व हैं, खुला आकाश नहीं है। मानो प्रजातंत्र न होकर सज़ातंत्र हो गया। क्या इसी तरह नया भारत निर्मित होगा? राजनीति सोच एवं व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हो ताकि अब कोई गरीब नमक और रोटी के लिए आत्महत्या नहीं करें और किसी युवा के सपनें आधे-अधूरे न रह जायें।

भारत की युवापीढ़ी मौलिकताप्रिय है। क्योंकि कोई भी व्यक्ति दूसरों की नकल कर आज तक महान् नहीं बन सका। सफलता का अनुकरण नहीं किया जा सकता। मौलिकता अपने आप में एक शक्ति है जो व्यक्ति की अपनी रचना होती है एवं उसी का सम्मान होता है। संसार उसी को प्रणाम करता है जो भीड़ में से अपना सिर ऊंचा उठाने की हिम्मत करता है, जो अपने अस्तित्व का भान कराता है। नरेन्द्र मोदी को इसीलिये युवा पसन्द करते हैं कि उन्होंने मौलिकता के शिखर गढ़े हैं। मौलिकता की आज जितनी कीमत है, उतनी ही सदैव रही है। जिस व्यक्ति के पास अपना कोई मौलिक विचार है तो संसार उसके लिए रास्ता छोड़ कर एक तरफ हट जाता है और उसे आगे बढ़ने देता है। मौलिक विचारक तथा काम के नये तरीके खोज निकालने वाला व्यक्ति ही समाज की सबसे बड़ी रचनात्मक शक्ति होता है। अन्यथा ऐसे लोगों से दुनिया भरी पड़ी है जो पीछे-पीछे चलना चाहते हैं और चाहते हैं कि सोचने का काम कोई और ही करे।

चलते व्यक्ति के साथ कदम मिलाकर नहीं चलने की अपेक्षा उसे अडं़गी लगाते हैं। सांप तो काल आने पर काटता है पर दुर्जन तो पग-पग पर काटता है। यह निश्चित है कि सार्वजनिक जीवन में सभी एक विचारधारा, एक शैली व एक स्वभाव के व्यक्ति नहीं होते। अतः आवश्यकता है दायित्व के प्रति ईमानदारी के साथ-साथ आपसी तालमेल व एक-दूसरे के प्रति गहरी समझ की। संभवतः युवाओं की इसी भूमिका को रेखांकित करने के लिए प्रधानमंत्री ने यह कहा कि देश के युवाओं को अराजकता, अव्यवस्था आदि से चिढ़ है और वे परिवारवाद, जातिवाद, साम्प्रदायिक संकीर्णता को पसंद नहीं करते। इसका सीधा मतलब है कि युवाओं को अराजकता से दूर रहने के साथ ही उन शक्तियों से सतर्क रहने की भी जरूरत है जो उन्हें गुमराह करती हैं। ईमानदार होना आज अवगुण है। अपराध के खिलाफ कदम उठाना पाप हो गया है। धर्म और अध्यात्म में रुचि लेना साम्प्रदायिक माना जाने लगा है। किसी अनियमितता का पर्दाफाश करना पूर्वाग्रह माना जाता है। सत्य बोलना अहम् पालने की श्रेणी में आता है। साफगोही अव्यावहारिक है। भ्रष्टाचार को प्रश्रय नहीं देना समय को नहीं पहचानना है। आखिर नयी गढ़ी जा रही ये परिभाषाएं समाज और राष्ट्र को किन वीभत्स दिशाओं में धकेल रही है? विकासवाद की तेज आंधी के बावजूद हमारा देश, हमारा समाज तरह-तरह के बंधनों में आज भी जकड़ा हुआ है। उसमें न आत्मबल है, न नैतिक बल। सुधार की, नैतिकता की बात कोई सुनता नहीं है। दूर-दूर तक कहीं रोशनी नहीं दिख रही है। बड़ी अंधेरी रात है। इन जटिलताओं के बीच युवा-भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है, रोशनी के लिये युवाओं को ही नन्हें-नन्हें दीपक बनना होगा।

प्रेषकः

– ललित गर्ग-



source https://krantibhaskar.com/mann-ki-baat-on-the-role-of-youth/

मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

उदवाड़ा में आयोजित इरानशाह उदवाड़ा उत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री

उदवाड़ा में आयोजित इरानशाह उदवाड़ा उत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री

वापी। रविवार को मुख्यमंत्री विजय रुपाणी उदवाड़ा में चल रहे इरानशाह उदवाड़ा उत्सव में सहभागी हुए। उन्होंने कहा कि 13 सौ वर्ष पहले  धर्म की रक्षा के लिए अपना वतन छोड़कर भारत आने वाले पारसी समरसता और बंधुत्व का श्रेष्ठ उदाहरण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए वतन छोडऩे के लिए मजबूर होने वाले लोग वतन से दूर होने की पीड़ा समझ सकते हैं। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कहा कि धर्म रक्षा के लिए देश छोडऩे को मजबूर होकर और बरसों तक शरणार्थी बनकर तकलीफ सहने वालों के प्रति संवेदनशीलता के साथ उन्हें नागरिकता देने वाले नागरिकता बिल का वोटबैंक की राजनीति के कारण विरोध करने वाले लोग स्वयं गुमराह हैं। उन्होंने कहा कि सीएए किसी की नागरिकता छीनने वाला बिल नहीं है। मुख्यमंत्री रुपाणी ने कहा कि गुजरात और भारत सरकार सदा सर्वदा पारसी कौम के सुख दु:ख के साथ रहेगी और साथ मिलकर प्रजा के कल्याण के लिए काम करने की भावना भी व्यक्त की। उल्लेखनीय है कि समग्र विश्वमें से यात्री यहां पवित्र अग्नि के दर्शन करने आते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पारसी समाज के अद्भुत प्रदान को समझकर उनके गौरवपूर्ण इतिहास को विश्व विख्यात बनाने के लिए उदवाड़ा में इरानशाह उत्सव शुरू किया गया। इस तीन दिवसीय उत्सव में हेरीटेज वॉक फोटो गैलेरी, स्ट्रीट आर्ट, टजर हंट स्पर्धा, एन्टीक घड़ी जैसे वस्तुओं का प्रदर्शन और बिक्री, पारसी समाज की स्वादिष्ट व्यंजनों और कला संस्कृति के प्रदर्शन का मेला भी आयोजित किया गया है।



source https://krantibhaskar.com/chief-minister-joins-iranshah-udwada-festival-held-in-udwara/