जोधपुर। जोधपुर केन्द्रीय कारागृह में 20 वर्ष जेल की सजा काट रही आसाराम मामले की सह अभियुक्त संचिता उर्फ शिल्पी की ओर से सजा स्थगन व जमानत पर रिहा किए जाने की याचिका की सुनवाई शुक्रवार को भी हाईकोर्ट में अधूरी रही।
जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ में शुक्रवार को शिल्पी के वकील महेश बोड़ा ने बहसकी जो अधूरी रही। इस पर बहस पूरी नहीं होने पर सोमवार को सुनवाई जारी रहेगी। इससे पहले गुरुवार को अभियोजन पक्ष की ओर से आपत्ति पेश की गई थी कि मामला आसाराम से सम्बद्ध है और उनकी ओर से भी सजा को चुनौती देते हुए अपील पेश की गई है जिसकी सुनवाई खंडपीठ में होगी, इसलिए शिल्पी के सजा स्थगन की सुनवाई भी खंडपीठ में होनी चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता महेश बोड़ा व निशांत बोडा ने कहा कि यह अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को लंबा खींचने की चाल है जबकि इस मामले की सुनवाई विधि अनुसार एकलपीठ में ही होनी चाहिए। बता दे कि एससी एसटी मामलात की स्पेशल कोर्ट ने शिल्पी को 20 साल के कारावास की सजासुनाई थी। इस सजा के खिलाफ शिल्पी की अपीलहाईकोर्ट में लंबित है।
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सोमवार, 10 सितंबर 2018
अधूरी रही शिल्पी की सजा स्थगन की सुनवाई
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