प्रशासक की आँखों पर पट्टी है या हाथों में बंडल ? सवाल और शिकायत दोनों का हाल यहाँ उस कब्र की तरह दिखाई देता है जिस पर मिट्टी कब्र के आकार और वज़न दोनों से अधिक होती है! दानह में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ हुई शिकायतों पर कार्यवाही में कितना विकास हुआ यह तो प्रशासन में धूल चाट रही फाइले बता देंगी, लेकिन उन शिकायतों पर कार्यवाही की धीमी गति के चलते उन भ्रष्ट अधिकारियों के भ्रष्टाचार एवं भ्रष्टाचार करने के मनोबल में कई गुना विकास होता दिखाई दे रहा है और ऐसा ही शिकायतकर्ताओ और जनता का कहना है।संध प्रदेश दादरा नगर हवेली में भ्रष्टाचार में लिप्त कुछ ऐसे खास विभाग है जिनके नामों की सूची दानह की स्थानीय जांच एजेंसियों से लेकर सीबीआई तक के पास उपलब्ध बताई जाती है बताया जाता है कि उन खास विभागों में खासा भ्रष्टाचार हुआ है और हो रहा है जिसकी शिकायते लिखित और मौखिक रूप में दानह प्रशासक कार्यालय तथा विकास आयुक्त कार्यालय में एक लंबे समय से जांच के लिए लंबित बताई जाती है, लेकिन शायद विकास का झण्डा लेकर घूमने वाले अधिकारियों के पास इतना भी समय नहीं है कि वह उस विकासनिधि का दुरुपयोग रोक सके। कहने को तो प्रशासक बड़े सख्त है लेकिन इनकी सख्ती किस मामले में अधिक है इसका आंकलन जनता एवं गृह मंत्रालय को करने कि जरूरत है!
इनके भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना प्रशासक के लिए नाकों तले चने चबाने के बराबर.... लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता एस एस भोया, विनोबाभावे अस्पताल के अधीक्षक डाक्टर दास एवं दमन-दीव व दानह के वन संरक्षक देबेन्द्र दलाई, इन तीनों अधिकारियों को मानों प्रशासक और विकास आयुक्त से भ्रष्टाचार करने के साथ साथ इस मामले में भी छूट मिल गई हो कि इनके किसी भी काले कारनामे पर प्रशासन अपनी काली नज़र नहीं डालेगी, क्यों कि जिस प्रकार इन तीन अधिकारियों में प्रशासन ने दर्जनों विभाग बांट रखे है उसे देखकर तो यही लगता है कि या तो प्रशासन के बड़े अधिकारी इनके भ्रष्टाचार में शामिल है या कोई और कारण है जिसके चलते प्रशासक इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ शिकायत और सवाल इन दोनों जांच के काँटों को कब्र में दबा रखे है!वैसे तो दानह मे इन अधिकारियों के भ्रष्टाचार को लेकर कई किस्से आम है लेकिन इसके बाद भी अगर यह अब तक निलंबन से बचे है तो उसका मुख्य कारण है बड़े अधिकारियों का सहयोग और भ्रष्टाचार करने और बच निकलने का भरपूर अनुभव, जैसे कोई शातिर अपराधी अपराध करने के बाद अपने पीछे कोई सुराख नहीं छोड़ता वैसे ही यह अपने पीछे कोई भ्रष्टाचार का सबूत नहीं छोड़ते, अगर कहीं किसी मामले में गलती हो गई और किसी प्रकार के भ्रष्टाचार के सुराख जनता या सामाजिक कार्यकर्ताओं के हाथों लग भी गए तो इनमे इतना हुनर और अनुभव है की उस मामले की जांच और जांच के निर्णय दोनों को यह अपने रिटायर होने तक तो दबवा के ही रखेंगे! - घोटाले के बाद घोटाले की जांच में भी घोटाला !
इनके भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना प्रशासक के लिए रेत से तेल निकालने के समान!
हुनर इतना की जारी जांच शायद इनके रियरमेंट के बाद भी जारी ही रहे!
कैसे होते है ई-टेंडर में घोटाले... इन तीनों विभागो के अधिकारी टेण्डर भरने वाले से ही पहले एस्टिमेट मँगवाते है और उन एस्टिमेट के आधार पर टेण्डर निकालते है, टेण्डर का वर्क-आर्डर जारी होने के बाद एक्स्ट्रा वर्क करवाते है ताकि घोटाले और भ्रष्टाचार में इजाफ़ा किया जा सके, वर्क आर्डर में लिखी गई वस्तुए समान बदल कर अपनी इच्छानुसार विकासनिधि का विनाश करते है, और कनिय अभियंता से लेकर अधीक्षक अभियंता तक को इस खेल में भागीदार बनाते है।
[caption id="attachment_38324" align="alignright" width="300"]
कई बेंको में एस एस भोया के खाते और खातों में कितना काला धन ? - सयाहक अभियंता एस एस भोया के बारे में सूत्रों का कहना है कि दानह कि कई बैंकों में इनके खाते है जिनमे से कई खाते ऐसे है जिनके बारे में विभाग के कई कर्मचारी जानते है तथा एस एस भोया अपने कुछ चुनिन्दा कर्मचारियों के माध्यम से उन खातों में भ्रष्टाचार से कमाया काला धन भी जमा करवाते है, कई खाते इनके नाम पर बताए जाते है तो कई इनके सगे संबंधियों के जिनके खाते में भोया के भ्रष्टाचार का काला धन है, शायद अब तक आयकर विभाग को इस बात कि जानकारी नहीं है, लेकिन दानह लोक निर्माण विभाग के कई कर्मचारी ऐसे अवश्य है जिनहे इस मामले की जानकारी है! अब इस मामले में प्रशासक क्या कार्यवाही करते है यह तो प्रशासक ही जाने लेकिन इन तीनों अधिकारियों का लंबा कार्यकाल और भ्रष्टाचार कर बच निकलने का बढ़ता मनोबल देखकर तो यही लगता है की प्रशासक शायद इस बार भी हाथ मलते रह जाएंगे और यह तीनों अपनी तीन पीढ़ियों के लिए इसी तरह जनता के विकास हेतु आए धन का दुरुपयोग कर अपने अपने और परिवार हेतु ऐशगाह का इंतजाम करते जाएंगे!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें