जोधपुर। जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागछ संघ के तत्वाधान में ज्ञान पंचमी ज्ञानग्रंथों की सजावट की तरह जोधपुर में प्रथम बार 45 आगमों की सजावट मन भावन प्रदर्शनी के रूप में आगम श्रृंगार सजाया संवारा गया।
संघ प्रवक्ता धनराज विनायकिया ने बताया कि श्री रत्न प्रभ धर्म क्रिया भवन प्रांगण में साध्वी प्रफुल्लप्रभा, वैरागपूर्णा की निश्रा में जिस तरह ज्ञान पंचमी के ज्ञानपद आराधना की जाती है व ग्रंथ सूत्रों की सजावट श्रृंगार के साथ पूजा अर्चना की जाती है। उसी तरह 24 अगस्त प्रात: 9.15 बजे से जैन धर्म के 45 आगमों की प्रदर्शनी का शुभारंभ दर्शन वंदन पूजा अर्चना के साथ किया जाएगा। एक एक आगम का विवेचन तप आराधना का आयोजन जिनशासन रसिक भव्य आत्माआें द्वारा प्रथम बार एेसा अनूठा अनोखा कार्यक्रम होगा।
आदिश्वर महिला मंडल की अध्यक्षा चंदू मोहनोत व विनायकिया ने बताया कि प्रवचन के दरम्यान साध्वी प्रफुल्लप्रभा ने कहा कि स्थानकवासी में 32 आगम तथा मूर्तिपूजक में 45 आगम की मान्यता विद्यमान है। उन्होंने मुंहपति के आठ पड़ व पूजा के वस्त्र के बारे में विस्तार से जानकार दी। साध्वी वैराग्यपूर्णा ने उपयोग में ही धर्म बताते कहा कि वर्तमान समय में धर्म संस्कारों की समझ और आत्मिक ज्ञान धर्म सिद्धांतों के प्रति दृढता और जिन शासन के प्रति समर्पण भाव बहुत अधिक जरूरी है। उन्होंने तिलक क्यों कैसे करना व इससे क्या लाभ तिलक की महिमा आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
source https://krantibhaskar.com/45-proceeds-in-action-house/
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