जोधपुर। नैतिकता के साथ-साथ जिम्मेदारी का अहसास ही भावी पीढ़ी को विकास के रास्ते पर ले जा सकता है जितना लिया है उससे दुगना गांव, गरीब व अपने क्षेत्र के विकास और आसपास के लोगों की मदद का भाव रखने से ही उन्नति सम्भव है। यह कहना है जोधपुर के पूर्व राजपरिवार की गायत्री राजे का। वे यहां जोधपुर में संभली ट्रस्ट की ओर से आयोजित 12 छात्रवृत्ति वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं। संभली ट्रस्ट की ओर से इस वर्ष शैक्षणिक सत्र के लिए 264 बालक बालिकाओं को शिक्षा के क्षेत्र में छात्रवृत्ति प्रदान की गई है।
संभली ट्रस्ट के फाउंडर ट्रस्टी गोविंद सिंह राठौड़ के अनुसार महज 5 बच्चों की सहायता के साथ ही सम्भली ट्रस्ट की स्थापना की थी। वर्ष 2007 में महिला सशक्तिकरण की दिशा में बोया गया बीज आज एक विशाल वृक्ष है जिसकी अनेकानेक शाखाएं देश नहीं बल्कि विदेशों में भी फैली है और बालिका शिक्षा स्वाबलंबन और रोजगार के क्षेत्र में जोधपुर के ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी बालिकाओं और शहरी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयासरत है।इसी कड़ी में वर्ष 2019- 1920 के लिए 264 बालिकाओं को ट्रस्ट के माध्यम से स्कॉलरशिप प्रदान की गई है, जिससे उनको शिक्षित बनाया जा सके। कार्यक्रम में जोधपुर जिले के ओसियां, बालेसर, जाखण, सेतरावा, सोलंकियातला, चाबा और बीकानेर के कुछ के क्षेत्रों के बच्चों को स्कॉलरशिप दी गयी।
कार्यक्रम में महिला थाना जोधपुर की किरण गोदारा, पब्लिक प्रोसिक्यूटर मोना चौहान, रोटरी मिडटाउन के अध्यक्ष पुनीत राव, रोटरी पद्मनी की अध्यक्षा राजश्री चौधरी , रोटरी संस्कार की सचिव विभा भूत और मधु विश्नोई ने भी संबोधित किया और चहुमुखी विकास के लिए संभली ट्रस्ट के कार्यो को सराहा। इस मौके पर संभली फ्रांस के अध्यक्षा एनालीस पॉउलीन का उनके बेहतरीन सहयोग के लिए गायत्री राजे और संभली ट्रस्ट के निदेशक गोविंद राठौड़ की ओर से बहुमान किया गया। ट्रस्ट के सचिव श्यामा तंवर ने संभली से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी। अधिवक्ता फिरोज खान ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन रतन सिंह और शक्ति सिंह खाखडक़ी ने किया।
सम्भली ट्रस्ट के इस कार्यक्रम में एना स्कूल चक विमन देट पेंट की आर्ट एक्जीबिशन भी लगाई गई। एना के अनुसार वो सम्भली में बतौर ट्यूटर अपना देश छोडक़र यहां आई है। वो यहां पिछड़ों को शिक्षा से जोडऩे पर काम कर रही है। सम्भली ट्रस्ट के कार्यक्रम में लगी आर्ट में पिछड़े वर्ग की महिलाओं और बच्चों ने अपनी दशा का खुद ने ही चित्रण किया है।
source https://krantibhaskar.com/264-boys-girls-to-scholarships/
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