कॉलेज के लिए सायली में दो वर्ष पूर्व ही जरूरी जमीन आवंटित की गयी थी
सिलवासा, सं. संघ प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली के ६३वें मुक्ति दिवस के शुभ अवसर पर प्रदेश के सांसद नटू पटेल ने सरकारी मंच से मेडिकल कॉलेज के संबंध में झूठा संदेश देकर प्रदेश की जनता को गुमराह करने की चेष्टा किया है. जो सच्चाई एवं हकीकत से विपरीत है. सरकारी मेडिकल कॉलेज के संबंध में सच्ची हकीकत यह है कि दो वर्ष पूर्व भारत सरकार द्वारा सायली में मंजूरी दे दी गयी थी एवं उसके लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा जरूरी जमीन भी आवंटित करा दी गयी थी. दानह की जनता ने इसका पूर्ण रूप से स्वागत कर सहकार दिया था. ऐसे संयोग में मेडिकल कॉलेज का विरोध किये जाने का आक्षेप कितना उचित है?
डोकमरडी में स्थित आदिवासी किसानों के लिए वर्षो पुराने सरकारी फार्म को बंद कर इस स्थल पर मेडिकल कॉलेज लाने के प्रस्ताव के समक्ष कई सामाजिक संस्थाओं, स्थानिक अखबारों तथा कई राजकीय पार्टियों ने अपना विरोध व्यक्त किया था. जिसके पीछे के मुख्य कारण में सर्वप्रथम सायली से मेडिकल कॉलेज हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? ४०-४५ वर्षों से कार्यरत सरकारी फार्म को एकाएक बंद करने की नौबत क्यों आन पड़ी? सबसे बड़ी एवं गंभीर बात यह है कि यह फार्म किसानों के जीवन के साथ जुड़ा है. जिसमें काफी संख्या में फल के झाड़ है तदोपरांत यहां किसानों के लिए बीज से लेकर रोपण एवं खाद तक की व्यवस्था की गयी है. साथ ही किसानों को जरूरी मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण भी दिया जाता है. इस फार्म के अंदर ४०० से ५०० आदिवासी खेत मजदूरों को रोजी-रोटी मिलती है. इस हकीकत को उजागर करने के लिए उठे विरोध को सांसद को समझने की जरूरत थी. उसकी जगह मुक्ति दिवस जैसे शुभ अवसर पर मेडिकल कॉलेज के विरोध का झूठा संदेश संघ प्रदेश की जनता को देकर हल्की राजनीति करने की कोशिश की है.
मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए आज से १० वर्ष पूर्व ही मोहनभाई डेलकर के मार्गदर्शन में कांगे्रस की जिला पंचायत ने भारत सरकार के प्लानिंग कमिशन के समक्ष ग्रामीण मेडिकल कॉलेज की दरखास्त पेश किया था. जिसके फलस्वरूप प्रदेश में मेडिकल कॉलेज आ रहा है. कांगे्रस के लिए यह गर्व की बात है, तो फिर मेडिकल कॉलेज का विरोध कहा उत्पन्न हो रहा है?
दानह कांगे्रस ने प्रदेश के हित में लोगों के भावनाओं की कद्र करते हुए प्रशासन के गलत निर्णय के समक्ष आज तक विरोध किया है. लुहारी में आदिवासियों की जमीन बचाने, ग्रामीण विस्तार में सस्ता अनाज की दुकान दिलाने इसका उत्तम उदाहरण है. आदिवासियों को जंगल की जमीन का हक दिलाने जैसी अनेक बातों पर भी प्रशासन के समक्ष रजुआत कर न्याय दिलाने का कार्य किया है. भविष्य में भी कांगे्रस प्रदेश के लोगों एवं खासकर किसानों, कामगारों एवं बेरोजगार युवाओं के लिए जरूरी पड़ेगा तो आवाज उठाकर न्याय दिलाने के लिए कटिबद्घ रहेगा. उक्त जानकारी दानह प्रदेश कांगे्रस के उपाध्यक्ष डॉ.टी.पी.चौहान द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गयी है.
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