शुक्रवार, 5 अगस्त 2016

ओआईडीसी के लूटेरों को सात साल की सश्रम कारावास की सजा

करीब चार साल पूर्व आरोपियों ने दिया था घटना को अंजाम

सिलवासा, सं. सिलवासा जिला एवं सत्र न्यायालय ने विगत वर्ष-२०१२ में सिलवासा के ओआईडीसी में लूट की घटना को अंजाम देने वाले दो आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्घ पाने पर सात-सात साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है.

गौरतलब है कि पिछले ९ अगस्त-२०१२ को शाम ६:१० बजे सिलवासा के डोकमरडी स्थित ओआईडीसी में मल्टी टास्किंग के पद पर कार्यरत नीरज जंगुभाई पटेल एवं रमेश चंद्र रोहित ड्यूटी पर थे. तभी महाराष्ट्र पासिंग की कार में सवार चार बदमाश अचानक काउंटर पर हाथ में डंडा, चाकू, चेन लिये आ धमके और मालखाने की चाभी मांगने लगे. मना करने पर बदमाशों ने नीरज पर हमला करते हुए उनके पर्स से १४,५०० रुपए एवं दो मोबाइल तथा रमेश रोहित के गले की सोने की चेन एवं सोने की अंगुठी छिन लिये. विरोध करने पर बदमाशों में से एक ने रोहित के सिर पर चाकू से हमला कर दिया था, जिसमें वह लहुलूहान होकर गिर पड़ा. बदमाश जबरदस्ती ट्रेजरी की चाभी मांगने लगे. जब कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि चाभी दमण जमा हो गयी है तो वे गुस्सा में आकर ओआईडीसी भवन में लगे सीसीटीवी कैमरे को तोड़ दिया, डीवीआर बॉक्स लूट लिये तथा कम्प्यूटर को तोडफ़ोड़ कर काफी नुकसान पहुंचायी. रमेश को तुरंत सिलवासा सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इधर फरियादी नीरज जंगुभाई पटेल इसकी सूचना तत्काल सिलवासा थाने में दी थी. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आयी और कंट्रोल रूम के माध्यम से दानह के सभी पुलिस थानों और चौकियों को सूचित किया गया था. पुलिस ने चारों तरफ नाकाबंदी शुरू कर दी. इसी बीच दादरा आउट पोस्ट की तत्कालिन इंचार्ज छाया टंडेल ने रोड पर बैरिकेट्स लगाकर जांच शुरू कर दी तभी महाराष्ट्र पासिंग की कार में सवार चार बदमाश आ धमके. पुलिस को देख उन्होंने वोल्टास कंपनी की तरफ हड़बड़ाहट में गाड़ी घुमा दिया लेकिन आगे रास्ता बंद होने से वे घबरा गये. इधर पुलिस ने भी बदमाशों का पीछा किया जिसमें दो बदमाश दीपक रामचंद्र चौहान निवासी धुळिया महाराष्ट्र एवं मनोज कुमार इजुआ मूल निवासी केरला, वर्तमान पता नालासोपारा मुंबई को पुलिस ने घेराबंदी कर दबोच लिया लेकिन दो बदमाश दिवाल फांद कर भागने में सफल हो गये थे. भागे बदमाशों ने वापी स्थित शेख ईशहाक नामक व्यक्ति के यहां पहुंचे और उनसे बोले कि हमलोगों की योजना सफल नहीं हो पायी, हम भाग जा रहे है, आप अखबार की सूचना से बतालाइएगा कि आगे क्या हुआ? बदमाशों ने यह भी कहा कि पकड़े गये दोनों की जमानत करा दिजीएगा. जिसपर शेख ईशहाक ने असमर्थता जतायी. इसी बीच घटना की जांच कर रही पीएसआई छाया टंडेल से क्राईम ब्रांच प्रभारी के.बी.महाजन को जांच सौंपी गयी. क्राईम ब्रांच ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अपराध संख्या १८४/२०१२ अंतर्गत धारा ३९४, ३९७, ३४२, ४२७ एवं ३४ आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश किया. जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. विवेचनाधिकारी द्वारा न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया गया, जहां से २१ मार्च-२०१६ को सेशन कमिट होने के बाद पूरे मुकदमे की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश एस.जी.मेहरे की अदालत में पूरी की गयी. अभियोजन पक्ष के वकील ओरनाल्डो मिराण्डा ने कुल १२ गवाह न्यायालय में पेश किये. माननीय न्यायालय ने अभियोजन एवं अभियुक्त पक्ष की तरफ से दलीलों को सुनने के बाद दोनों अभियुक्तों को दोषी पाते हुए उन्हें उपरोक्त धाराओं में सात-सात साल की सश्रम कारावास की सजा एवं ९०० रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है. जुर्माना की रकम अदा न करने पर दो माह की अतिरिक्त सजा मुलजिमानों को भुगतनी होगी. फरार दो अन्य मुलजिमानों को न्यायालय ने भगोड़ा घोषित किया है.

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