
मनीष कुमार, नई दिल्ली: वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus) यानी कोविड 19 (Covid 19) लगातार अपना कहर बरपा रहा है। देशमें 21 दिनों के लॉकडाउन का आज 17वां दिन है। कोरोना वायरस से निपटने के लिए 24 मार्च को रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च से पूरे देशभर में लॉक डाउन का एलान किया। इसके सबसे बड़ा असर देश की आर्थिक गतिविधि पर पड़ा है। और देश के आर्थिक गति को रफ्तार देने वाले ट्रांसपोर्ट सेक्टर को इसका सबसे बड़ा खामियाजा उठाना पड़ा है। जो इंटर स्टेट ट्रक सड़क पर रफ्तार भर रहे थे उसपर अचानक ब्रेक लग गया।
नतीजा ये हुआ कि करीब 3.5 लाख से ज्यादा ट्रक जिसमे करीब 35 से 40,000 करोड़ रुपये का सामान लदा है वो अनलोडिंग किये जाने के इंतजार में हाइवे के किनारे, फैक्टरी के अंदर बाहर या फिर ट्रांसपोर्टस के गोदाम के बाहर खड़ा हैं।
क्योंकि कोरोना वायरस के चलते एक तो लॉक डाउन है दूसरी तरफ ड्राइवर इस महामारी के डर से अपने अपने घर चले गए हैं। कुलतरण सिंह अटवाल, प्रेसिडेंट, ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपोर्ट कांग्रेस कहते हैं कि इन ट्रको को अपने गंतव्य स्थान तक पहुँचाने का रास्ता निकलना चाहिए।
कई ट्रकों में आम लोगों के इस्तेमाल में आने वाली जरूरी सामान है। मोटर ट्रांसपोर्टर्स कांग्रेस के मुताबिक सरकार ने ट्रकों के मूवमेंट की इजाजत दी हुई है लेकिन सरकार जो कहती है और जमीनी हकीकत में बेहद अंतर है। सरकार ज़रूरी चीजों के सप्लाई चेन को बनाये रखने का दावा करती है। लेकिन नीचे के अधिकारियों तक सरकार का ये आदेश नहीं पहुँचता। जिसके चलते कई ट्रकों में जरूरी चीज़ें लोड किया हुआ और ये जहां तहां खड़ी है। जबकि सरकार ने जरूरी और गैर जरुरी वस्तुओं के ट्रांसपोर्टशन की इजाजत दी हुई है।
गुजरात के बनासकांठा में बनास डेयरी के बाहर में लाइवस्टॉक लेकर ट्रक खड़े है लेकिन ट्रक को अनलोड नहीं किया जा रहा। राय बरेली के मॉडर्न रेल कोच फैक्टरी के अंदर बाहर 100 से ज्यादा ट्रक खड़े हैं। ट्रक के ड्राइवर हेल्पर 22 मार्च से अनलोडिंग का इंतजार कर रहे हैं। ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के मुताबिक लॉक डाउन का भारी नुकसान ट्रांसपोर्टर्स को हुआ। ट्रांसपोर्टर्स इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से राहत की फौरन मांग कर रहे।
source https://krantibhaskar.com/hindi/hindi-news/national-news/5291/
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