सोमवार, 1 अगस्त 2016

यहाँ के अधिकारी रिटायरमेंट के बाद भी काम करते है, दमन-दीव की सरकारी वेबसाइटों पर झूठी और फर्जी जानकारियाँ!

दमन : भूल और चूक दोनों एक बार हो तो बात समझ में आती है, लेकिन यहां तो वो हाल और हालत है जिनहे देखकर शायद भूल और चूक दोनों के बादशाह भी शर्मशार होकर चुल्लू भर पानी कि तलाश में निकलने को मजबूर हो जाए। यह बात इस लिए कहीं जा रही है क्यों कि प्रशासन के आला अधिकारियों कि लापरवाही और कामचोरी दोनों का सबूत खुद प्रशासन ही दे रही है और वह भी दमन-दीव व दानह कि ओफिसियल वेबसाइट पर।

क्रांति भास्कर ने दमन-दीव व दानह कि वेबसाइटों में पाई गई कामिया तथा अनियमितताओं पर कई बार ख़बरे प्रकाशित कि और उनकी कमियों और गलतियों से प्रशासन को रु-ब-रु करवाया, लेकिन शायद प्रशासनिक अधिकारियों को इस बात कि परवाह ही नहीं कि जनता के लाखों रुपये जिन वेबसाइटों पर खर्च हो रहे है कम से कम एक बार उन वेबसाइटों कि हालत और हालात पर नज़र डाल सके, या शायद ऐसा भी हो सकता है कि जिस तकनीक और आधुनिकीकरण के साथ भारत के प्रधान मंत्री कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहते है उस तकनीक और आधुनिकीकरण से यहां के प्रशासनिक अधिकारी कोई नाता ही नहीं रखना चाहते वरना यहां का हाल ऐसा नहीं होता जैसा फिलवक्त दिखाई दे रहे है।

दमन-दीव में अधिकारी निलंबित, सेवानिवृत, तथा तबादला होने के बाद भी काम करते है!

प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के तकनीकीकरण और आधुनिकीकरण के सपने को अंधे कुएं में धकेल रहे है दमन-दीव के प्रशासनिक अधिकारी

अब बात करते है दमन-दीव व दानह कि सरकारी वेबसाइटों कि, क्यों कि दमन-दीव व दानह के सरकारी कार्यालयों की जानकारी जनता को इनही वेबसाइटों पर से मिलती है यह और बात है कि फिलवक्त जो जानकारियाँ इन वेबसाइटों पर उपलब्ध है उनमे से कई जानकारियाँ ऐसी है जिनहे झुटा और फर्जी भी कहां जा सकता है या यह भी कहां जा सकता है कि दमन-दीव व दनह के प्रशासनिक अधिकारी प्रशासनिक विभागों कि गलत जानकारियाँ देकर जनता को गुमराह कर रहे है और प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के तकनीकीकरण और आधुनिकीकरण के सपने को अंधे कुएं में धकेल रहे है।

प्रधान मंत्री जी जरा ध्यान दे...

सालों से अपनी वेबसाईटें अपडेट नहीं करने वाले अधिकारी कैसा विकास कर रहे है?

वी-एच जेठवा - कार्यपालक अभियंता दमन लोक निर्माण विभाग खंड-1, कमल दत्ता - उप वन संरक्षक दमन-दीव, कमल दत्ता - प्रमुख वैज्ञानिक अधिकारी, डी त्रिपाठी - प्रिंसिपल गोवर्नमेंट कॉलेज, आर-एन सिह - अधीक्षक अभियंता यह दमन-दीव के उन अधिकारियों के नाम है जो या तो रिटायर हो गए या जिनका तबादला हो गया, लेकिन दमन-दीव व दानह प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार अब तक यह सभी अधिकारी दमन-दीव में ही काम कर रहे है, अब इसे प्रशासन की कामचोरी कहे या जनता को गुमराह करने की शाजिश क्यों कि अगर दमन दीव के प्रशासनिक कार्यालयों में दमन-दीव कि सरकारी वेबसाइट के अनुसार अधिकारी से मिलने निकले तो फिर वह उनसे कभी नहीं मिल पाएगी।

इस मामले में एक दूसरा पहलू और भी है जिसकी गंभीरता शायद दमन-दीव के नाकारा एवं कामचोर प्रशासनिक अधिकारी ना समझ पाए लेकिन इस देश के प्रधान मंत्री अवश्य समझ जाएंगे क्यों की जहां दमन-दीव प्रशासन सूचना के अधिकार के तहत दमन-दीव की जनता को सूचना देने का खोखला दावा करती है वहीं दमन-दीव प्रशासन की सरकारी वेबसाइट में सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारियों में आज के समय अनुसार यह फर्जी जानकारी मिली है, जिसे देखकर सूचना के अधिकार तहत जनता को जानकारी देने एव उक्त कानून के पालन करने दोनों मामलों में दमन-दीव प्रशासन साफ साफ विफल साबित होती दिखाई दे रही है।

वैसे तो सूचना के अधिकार के तहत गलत तथा झूठी जानकारी देने वाले अधिकारी पर सख्त से सख्त कार्यवाही करने का प्रावधान है लेकिन अब अपनी ही सरकारी वेबसाइट पर गलत तथा झूठी जानकारी देने वाले अधिकारियों पर दमन-दीव के प्रशासक क्या कार्यवाई करते है यह तो वक्त बताएगा, वैसे इस मामले को देखकर यही लगता है की दमन दीव के उन तमाम अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर देना चाहिए जिनका किसी ना किसी रूप में इस मामले से नाता रहा हो फिर चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों ना हो या सवय प्रशासक ही क्यों ना हो यह और बात है की प्रशासक भले ही अपने आप को इतने छोटे से मामले के लिए दोषी या ज़िम्मेवार नहीं मानते होंगे, लेकिन प्रशासक को इस बात को भी समझना होगा की जिम्मेवारी का ना कोई आकार होता है ना वज़न! लेकिन अगर इस मामले में प्रधान मंत्री तथा केंद्रीय सूचना आयोग कोई ठोस कदम नहीं उठाता तो शायद आने वाले समय में भी यहाँ के प्रशासनिक अधिकारी इस तरह की झूठी जानकारियों से जनता को गुमराह करते रहेंगे।

यह अभी भी दमन-दीव प्रशासन में काम करते है।   

वी-एच जेठवा - कार्यपालक अभियंता 

कमल दत्ता - उप वन संरक्षक दमन-दीव

कमल दत्ता - प्रमुख वैज्ञानिक अधिकारी

डी त्रिपाठी - प्रिंसिपल गोवर्नमेंट कॉलेज

आर-एन सिह - अधीक्षक अभियंता

आखिर कैसे और किस विकास कि रिपोर्ट देखता है गृह मंत्रालय एवं प्रधान मंत्री कार्यालय?

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कहां और सुना जाता है कि समय समय पर दमन-दीव के विकास कि नियमित रिपोर्ट गृह मंत्रालय भी लेता है और प्रधान मंत्री कार्यालय भी दोनों संध प्रदेशों में यहां हो रहे विकास और कार्य कलापों कि रिपोर्ट दी जाती है, लेकिन इस मामले को देखकर लगता है कि या तो दमन-दीव के प्रशासनिक अधिकारी केंद्रीय प्रशासन को गलत रिपोर्ट देते है या फिर केंद्रीय प्रशासन के पास इतना समय ही नहीं है कि दमन-दीव से भेजी गई रिपोर्ट कि अच्छी तरह पड़ताल करें कि इसमे सच कितना है और झूठ कितना है? क्यों कि अगर यहां कि सरकारी वेबसाइटों के यह हालत है तो बाकी मामलों का तो भगवान ही मालिक होगा!

 

 

 

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